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सड़क हादसे में संत वेदांती महाराज का निधन, आश्रम में बनेगी समाधि

ऋषिकेश से ली थी वेदांत डिग्री, भारत भ्रमण के लिए १८,५०० किमी की पैदल यात्रा की थी

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खरगोन

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Hemant Jat

Jun 27, 2018

Sant Vedanti Maharaj Bramhalin,

ब्रम्हलीन संत संजय वेदांती महाराज।


कसरावद.
्रनर्मदा तट स्थित माकड़खेड़ा के वेदांत विला आश्रम के संत संजय वेदांती महाराज मंगलवार की सुबह ब्रम्हलीन हो गए हैं। रायसेन-भोपाल मार्ग पर मंगलवार की सुबह करीब 9.30 बजे हुए सड़क हादसे में उनका निधन हो गया। बुधवार को प्रात: 7 से 11 बजे तक उनकी पार्थिव देह को वेदांत विला आश्रम माकड़खेड़ा में श्रृद्धालु और अनुयायियों के दर्शनार्थ रखा जाएगा। इसके बाद महाराज को आश्रम में ही समाधिस्त कि या जाएगा। आश्रम सूत्रों के अनुसार संत संजय वेदांती महाराज अन्य कुछ अनुयायियों के साथ दो अलग-अलग गाडिय़ों से जगन्नाथधाम देव दर्शन यात्रा पर गए थे। वहां से लौटते समय रायसेन-भोपाल मार्ग पर उनका चार पहिया वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में उनका निधन हो गया। उनके शव को पोस्ट-मार्टम के लिए भोपाल ले जाया गया। पीएम के बाद शाम को माकड़खेड़ा लाया गया।

निधन की खबर से शोक में डूबा निमाड़
बाबा के निधन की खबर फैलते ही उनके अनुयायियों के साथ क्षेत्रवासी स्तब्ध हो गए। समूचे क्षेत्र में शोक छाया है। जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में अनुयायियों का माकड़खेड़ा आश्रम पहुंचने का सिलसिला प्रारंभ हो गया। आश्रम पर अत्यधिक भीड़ जुटने की संभावनाओं को लेकर सुरक्षा की दृष्टि से एहतियातन प्रशासन ने आश्रम में पुलिस बल भेजा है।

ऋषिकेश से ली थी वेदांत डिग्री
ब्रम्हलीन संत वेदांती महाराज ने 8 वर्ष की आयु में गृहस्थ छोड़ दिया था। उन्होंने मां गायत्री को गुरू मानते हुए ऋषिकेश से वंदांत की डिग्री ली। महाराज ने 18,500 किलो मीटर पैदल भारत भ्रमण किया। उन्होंने सायकल से चारधाम यात्रा पूरी की है।

नाया गांव में बनाया था आश्रम
वर्ष 2002 में उन्होंने बड़वाह क्षेत्र के नाया गांव में आश्रम बनाया। बाद में वर्ष 2008 में उन्होंने माकड़खेड़ा में वेदांत विला आश्रम की स्थापना की। यहां मां नर्मदा की सेवा के साथ समय-समय पर लगातार भंडारों के आयोजन करते रहे। वे भागवत और राम कथा भी करते थे।