
मंदिर में नाग-नागिन के साथ पवित्र शिवलिंग
पत्रिका@खरगोन
धर्मग्रंथों में लिखा है कि भगवान कण-कण में विराजमान होते हैं। जिन्हें केवल मन की आंखों से देखा जा सकता है। निमाड़ की धरती पर भी ऐसे ही अद्भूत और चत्मकार मंदिर है, जहां भगवान शिवशंकर कई रूपों में विराजमान है। करही के पास महादेव खोदरा में गुफा के अंदर पवित्र शिवलिंग है। जिसे निमाड़ के अमरनाथ की उपमा दी गई है। इसी तरह नन्हेश्वर महादेव और ऊन में नीलकंड महादेव मंदिर विशेष महत्व रखते हैं। तीनों मंदिरों की विशेषता से जुड़ी एक रिपोट..।
गुफा के अंदर पवित्र शिवलिंग, सालभर दर्शन के लिए आते हैं श्रद्धालु
करही.
नगर से 8 किलोमीटर दूर गांव रोशयाबारी में दुर्गम पहाड़ी (विध्यांचल पर्वत) पर गुफा में पवित्र शिवलिंग स्थापित है। इस जगह को महादेव खोदरा नाम से जाना जाता है। इसी प्राचीन मंदिर को लेकर कई धार्मिक और पौराणिक कथाएं प्रचलित है। सावन में प्राचीन शिवलिंग लोगों की श्रद्धा व आस्था का केंद्र बना हुआ है। मंदिर के लिए रास्ता पथरीला और फिसलन वाला होने के कारण कई श्रद्धालु गुफा के दर्शन से वंचित थे। शिवरात्रि के दौरान छोटी जाम पंचायत ने विंधयाचल पर्वत के शिखर वाले रास्ते को सुगम बनाते हुए रेलिंग वाली सीढिय़ों का निर्माण किया है। जिसके बाद यहां तक श्रद्धालु आसानी से पहुंचने लगे है। जाम दरवाजा के नड़दीक गुलरचौकी माधवपुरा के मार्ग होते हुए बुरालिया गांव से यहां पहुंचा का सकता है।
गुफा में नाग-नागिन के साथ शिवलिंग
मंदिर में गुफा के अंदर प्रवेश करते ही सबसे पहले नाग नागिन के जोड़े के दर्शन होते हैं। नाग नागिन की है प्रतिमा पत्थरों में की गई है इसके आगे ही प्राचीन शिवलिंग के दर्शन होते हैं। साल भर श्रद्धालुओं दर्शन लिए आते हैं। चारों ओर हरियाली की चादर से घेरे जंगल और पहाड़ी पर बसे मंदिर को देख भक्तों को अध्यात्मिक सूख प्राप्त होता है। ग्रामीणों की मांग है कि उक्त धर्मस्थल को पर्यटक स्थल घोषित किया जाए। इंदौर, महू, पीथमपुर सहित करही पाडल्या, बन्डेरा, कतरगांव, सोमाखेड़ी, भुदरी, मंडलेश्वर , महेश्वर दर्शन के लिए श्रद्धालु हर साल पहुंचते हैं।
नन्हेश्वर महादेव में पानी के अंदर शिवलिंग के दर्शन
भगवानपुरा.
महर्षि मार्केंडेय ऋषि की तपोस्थलीनन्हेश्वर धाम शिवभक्तों की आस्था का केंद्र है। यहां सावन सोमवार को दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है। मंदिर के गर्भगृह में शिवलिंग पूरे समय पानी में डूबा रहता है। इसके दर्शन के लिए भक्त यहां आते हैं। सावन में हरिओम बाबाजी के सान्निध्य में ऊं नम: शिवाय का अखंड जाप चल रहा है, जो विगत वर्षो से निरंतर चल रहा है। हरिओम बाबा ने बताया कि नन्हेश्वर धाम में महर्षि मार्केंडेय ऋषि 21 कल्प के बाद अमर हुए थे, तभी से यह स्थल पवित्र कहलाता है। 1333 ईसवीं से जल मंदिर में स्थित हाटकेश्वर भगवान का मंदिर खंडित है जिसका निर्माण चल रहा है । मंदिर का जनसहयोग से भव्य निर्माण हो रहा है। जिस पर करीब एक करोड़ से अधिक खर्च होना है। इसे पूर्ण होने में एक वर्ष से अधिक समय लगेगा बनने पर यह भव्य दिखेगा साथ ही पूरे निमाड़ सहित पूरे प्रदेश में अपनी प्रसिद्धि प्राप्त करेगा । फिलहाल मन्दिर निर्माण में 50 लाख से अधिक की राशि लग चुकी है।
नीले पत्थर से निर्मित मंदिर, इसलिए तो कहते हैं नीलकंठ
ऊन.
मंदिरों की नगरी के नाम से प्रख्यात ऊन में कई प्राचीन मंदिर है। ग्राम में राजा बल्लाल द्वारा तेरवीं शताब्दी में 99 मंदिरों का निर्माण कराया गया था। यहां नीलकठश्वर महादेव मंदिर आदिकाल की कला का अद्भूत उदाहरण है। मंदिर में पार्थिव शिवलिंग का ऊपरी हिस्सा अतिप्राचीन नीले पत्थर से निर्मित है इसलिए यहां विराजित शिवलिंग को नीलकंठेश्व महादेव कहा जाता है। वहीं जमीनी गफा में पाताल में निर्मित हटकेश्वर महादेव मंदिरभी आस्था का प्रमुख केंद्र है। प्रतिवर्ष यहा श्रद्धालु कावड़ यात्राओं के माध्यम से अभिषेक करने पहुंचते है। यहां स्थान महाकालेश्वर मंदिर की उज्जैन स्थित महाकाल के समान महत्ता रखा है।
Updated on:
29 Jul 2019 01:44 pm
Published on:
29 Jul 2019 01:42 pm
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