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नवाचार… प्रायवेट स्कूलों की तरह सरकारी स्कूलों के शिक्षक भी घर-घर दे रहे दस्तक, बता रहे क्वालिटी

प्रायवेट स्कूलों की तर्ज पर छपवाए पर्चे, आकर्षित करने वाले स्लोगन भी डाले

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खरगोन

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Hemant Jat

Apr 10, 2018

school chale abhiyan news

पालकों को आकर्षित करने सरकारी स्कूल के शिक्षकों द्वारा बांटे जा रहे कार्ड।


खरगोन.
जब बेहतर सुविधाएं तो क्यों न अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाएं। पैसा कुछ भी खर्च न होगा, न होगा घर मेें क्लेश। अबकी बार बस लेना तुम, सरकारी स्कूल में प्रवेश। यह स्लोगन इन दिनों कसरावद ब्लॉक के बामंदा में आकर्षण का केंद्र है। स्लोगन से यह समझ तो आ रहा है कि मामला स्कूल में प्रवेश का है। लेकिन मार्केटिंग का यह हाईटेक उपयोग कोई प्रायवेट स्कूल नहीं बल्कि सरकारी स्कूलें कर रही है। इस बार गांव की प्राथमिक स्कूलों में एडमिशन बढ़ाने के लिए प्रधानपाठकों ने अपने स्तर पर नवाचार किया है। रंग-बिरंगे पर्चों में स्कूल की विशेषताएं। डोर-टू-डोर जाकर अंगुलियों पर स्कूल की क्वालिटी गिनाते शिक्षक और आकर्षित करने वाले स्लोगन बच्चों व पालकों को रिझाने के मूल मंत्र है। स्कूल प्रबंधन ने प्रायवेट स्कूलों की तर्ज ही पर फ्लैक्स बैनर छपवाए हैं। पैरेंट्स की मीटिंग लेकर उनके विचार लिए जा रहे हैं। शासकीय प्राथमिक विद्यालय की प्रधान पाठक सीमा वर्मा व शा. उर्दू प्राथमिक विद्यालय की प्रधानपाठक तरुन्नम खान ने बताया शुरुआती दौर में पालकों से अच्छा प्रतिसाद मिला है। उम्मीद है प्रायवेट की तुलना सरकारी स्कूल में प्रवेश बढ़ेगा। उल्लेखनीय है कि कुछ वर्षों से प्रवेश को लेकर सरकारी स्तर पर शिक्षा का स्तर कमजोर हो गया है। पर्याप्त बच्चे न होने से जिले में २९५ स्कूल बंद हो गए। प्रधानपाठकों ने बताया शिक्षकों की टीम बनाई है, जो घर-घर जाकर बच्चों और पालकों से संपर्क कर रहे हैं। पालकों और बच्चों को इस बार के परीक्षा परिणाम के साथ स्कूलों में उपलब्ध सुविधा, सरकारी योजना, शिक्षकों के अनुभव के साथ अन्य महत्वपूर्ण जानकारी दी जा रही है। इस बार स्कूल चले हम अभियान महज औपचारिकता न होकर हकीकत में अभियान के तौर पर ही चल रहा है। विभाग का अमला साधन, संसाधन के साथ तन-मन-धन से स्कूलों में प्रवेश बढ़ाने में जुटे हैं।
ऐसे लुभाएंगे पालकों-बच्चों को
स्कूल के जनशिक्षक महेश पाटीदार ने बताया लोगों के बीच अपनी बात रखने के लिए पेम्प्लेटï्स छपवाए हैं। इसमें सर्व शिक्षा अभियान के लोगों को आकर्षित ढंग से लगाया है। इसके अलावा विशेषताओं में नि:शुल्क मिलने वाले प्रवेश से लेकर नि:शुल्क शिक्षा, नि:शुल्क पाठ्यक्रम, नि:शुल्क साइकल, समग्र छात्रवृत्ति, रुचिकर भोजन, स्वादिष्ट दूध व निशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण का उल्लेख किया है।

जिले में २९५ स्कूल बंद
जिले की बढ़ती आबादी के बीच शिक्षा विभाग ने बीते कुछ सालों में ऐसा कीर्तिमान रचा है जो दुखद है। जिला शिक्षा केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार बीते कुछ सालों में जिले के 295 प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों पर ताले लटक चुके हंै। जानकारी के अनुसार वर्ष 2011 तक जिले की कुल 26८ स्कूल और वर्ष 2012 में 2७ स्कूलों को मर्ज किया गया।

सबसे ज्यादा स्कूल यहां हुए बंद
विभाग की आंकड़ों की माने तो स्कूल बंद होने के मामले में आदिवासी बाहुल्य ब्लॉक बेहतर स्थिति में है। वहीं बड़वाह में अब तक 71 तो महेश्वर में 55 स्कूलों का युक्तियुक्तकरण किया गया है। उल्लेखनीय है कि ये दोनों ही क्षेत्र जिले में एजुकेशन हब बनकर उभर रहे है। यहां पालक अपने बच्चों को निजी स्कूलों में ही प्रवेश करवा रहे हंै। जिससे सरकारी स्कूल खाली होते जा रहे हैं।

इस ब्लॉक में इतने स्कूल बंद हुए
बड़वाह - 71
भगवानपुरा - १५
भीकनगांव - १४
गोगावां - १०
कसरावद - ६०
खरगोन - ३५
महेश्वर - ५५
सेगांव - ०३
झिरन्या - ०५
(स्त्रोत:- डीपीसी कार्यालय।)