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गरजे किसान, बोले- माचिस की डिब्बी बनाने वाली कंपनी अपने उत्पाद का दाम तय करती है तो किसान क्यों नहीं

किसान बोले- सरकार को चीतों की चिंता, मगर दम तोड़ती गायों को बचाने ठोस प्लॉन नहीं

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खरगोन

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Amit Onker

Sep 23, 2022

farmers protest

किसानों ने ज्ञापन देते हुए तीखे अंदाज में रखी अपनी मांगें।

खरगोन. फसलों का वाजिफ दाम और गायों पर आए लंपी अटैक सहित अन्य मांगों को लेकर गुरुवार को भारतीय किसान मजदूर महासंघ के बैनर तले किसान सड़कों पर उतरे। तल्ख स्वर में प्रशासन को घेरते हुए सरकार को खरी-खोटी सुनाई। संघ पदाधिकारियों व किसानों ने कहा- सरकार चितों की चिंता कर रही है। लेकिन प्रदेश में गौवंश लंपी वायरस जैसे जानलेवा संक्रमण से असमय काल के ग्रास बन रहे है, उनके लिए कोई ठोस कदम नहीं। केवल टीकों के नाम पर पशुपालकों को गुमराह किया जा रहा है। जब एक छोटी सी माचिस की डिबिया बनाने वाली कंपनी अपने उत्पादन का दाम तय कर सकती है तो किसान अपनी उपज का दाम खुद तय क्यों नहीं कर सकते? किसानों के इन तीखे सवालों के जवाब किसी के पास नहीं थे।


भारतीय किसान मजदूर महासंघ के पदाधिकारियों ने किसानों की जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर की समस्याओं को लेकर सबसे पहले अनाज मंड में सभा की। इसके बाद रैली निकालकर ज्ञापन देने शाम 4 बजे कलेक्टोरेट पहुंचे। यहां कार्यालय के प्रवेश द्वार पर सांकेतिक धरना दिया। इसके बाद नारेबाजी कर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और कलेक्टर के नाम 33 सूत्रीय मंागों का ज्ञापन डिप्टी कलेक्टर ओमनारायणसिंह को सौंपा। इस दौरान महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रविदत्त दद्दा, बहादुरसिंह ठाकुर, रामेश्वर गुर्जर, किशोर पाटीदार, सीताराम इंगला, गोपाल पाटीदार सहित जिलेभर के किसान मौजूद थे।


14 हजार से 2 हजार पर आया कपास का भाव
किसानों ने कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन के दौरान आक्रोश जताया। कहा- अतिवृष्टि से फसलें खराब हो रही हैं। लेकिन नुकसानी सर्वे की कोई कार्रवाई नहीं। कपास की नई फसल आने से पहले कपास 14 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक बिका था, अब 2 हजार रुपए के भाव पर बिक लगा है। डिप्टी कलेक्टर ओम नारायण सिंह ने किसानों को आश्वस्त किया कि शासन. प्रशासन किसानों के साथ है। दाम कम क्यों हुए हैं इसकी समीक्षा करेंगे।


ज्ञापन में रखी यह मांगें
जिला स्तर पर मंडी में कपास खरीदी सूचकांक के अनुसार करने, तौलकांटों में पारदर्शिता लाने के लिए नियमित जांच, बलवाड़ी मंडी में व्यापारियों की मनमानी पर लगाम लगाने, मिर्च मंडी बेडिय़ा में बगैर अनुबंधक पत्र के हो रही खरीदी पर रोक लगाने, भसनेर देवली को जोडऩे वाली कुंदा नदी पर पुल बनाने जैसी स्थानीय मांगों के अलावा राज्य व केंद्र सरकार से जुड़ी मांगों के निराकरण की मांग की।