
बंगाल की राज्य पशु फिशिंग कैट के अस्तित्व पर संकट
लगातार हो रही मौतों से घट रही तादाद
लोगों का हमला भी बन रहा काल
आईयूसीएन की रेड सूची में वल्नरेबल के रूप में है दर्ज
कोलकाता
तेंदुए जैसे दिखने वाली बंगाल की राज्य पशु फिशिंग कैट के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। भोजन की तलाश में यह वन क्षेत्र से बाहर आ जाती है। जहां वन क्षेत्र में अवैध शिकार कर उन्हें मार दिया जाता है वहीं तेंदुए के भय से लोगों के हमले और सड़क हादसे का भी शिकार होना पड़ता है। घटती तादाद के कारण फिशिंग कैट इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) की रेड सूची में वल्नरेबल के रूप में दर्ज है।
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि फिशिंग कैट को आर्द्र भूमि में रहना पसंद है लेकिन पिछले 15 साल में 45 फीसदी आर्द्र भूमि खत्म हो गई है। जबकि अभी भी आर्द्र भूमि में गिरावट जारी है। इससे फिशिंग कैट का संरक्षण नहीं हो पा रहा है।
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आठ साल पहले राज्य पशु
वर्ष 2012 में राज्य सरकार ने फिशिंग कैट को बंगाल का राज्य पशु घोषित किया। राज्य सरकार ने कुछ सख्त कदम जरूर उठाए लेकिन फिशिंग कैट की घटती तादाद नहीं रुक पाई। वन्यजीव विशेषज्ञ तियासा आद्या ने बताया कि अप्रेल 2010 से मई 2011 के बीच हावड़ा में 27 फिशिंग कैट की मौत हुई थी। फिशिंग कैट के प्रति जन जागरूक अभियान भी चलाया जा रहा है।
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यहां है फिशिंग कैट का वास
बंगाल में हावड़ा, हुगली, बर्दवान, पूर्व व पश्चिम मेदिनीपुर, उत्तर व दक्षिण दिनाजपुर और सुंदरवन। इसके अलावा कॉर्बेट, दुधवा और काजीरंगा में भी फिशिंग कैट पाई जाती है। कुछ वर्ष पहले रणथंभौर टाइगर रिजर्व में कैमरा-ट्रैपिंग सर्वेक्षण में फिशिंग कैट की उपस्थिति दर्ज की गई थी। तटीय केरल में फिशिंग कैट विलुप्त हो गई है।
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पानी में गोता लगती है फिशिंग कैट
फिशिंग कैट सामान्य बिल्ली से दोगुनी आकार की होती है। यह मछलियों के शिकार के लिए पानी में गोता लगाने के साथ ही तैरती भी है। यह हर 15 मिनट में शिकार स्थल बदल लेती है। मछली के अलावा मेंढक, क्रस्टेशियन, सांप सहित अन्य जलीय प्रजातियों को भी अपना शिकार बनाती है।
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सजा का भी डर नहीं
आईयूसीएन के सदस्य और प्रकृति-पर्यावरण एवं वन्यजीव सोसायटी के सचिव विश्वजीत रॉय चौधरी का कहना है कि फिशिंग कैट को मारने पर सख्त कानून है। यह राजकीय पशु और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-1 के तहत संरक्षित है। तीन साल की सजा और 25000 रुपए का जुर्माना है। बावजूद इसके फिशिंग कैट लुप्त हो रही है।
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इस साल की घटनाएं
20 जनवरी : हुगली जिले के कोननगर में फिशिंग कैट मृत मिली। इसी माह हुगली में ही लोगों ने बाघ समझ कर दो फिशिंग कैट को मार दिया।
15 फरवरी : हावड़ा के नकोल गांव में रूपनारायण नदी से जु?ी एक नहर के पास फिशिंग कैट का कटा सिर मिला।
10 जून : पश्चिम मिदनापुर के रानजुरा गांव में हमला कर फिशिंग कैट को मार दिया।
11 जून : हावड़ा के आमता ब्लॉक के उदंग गांव में जहर देकर फिशिंग कैट को मारा।
8 जुलाई : मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में मृत फिशिंग कैट मिली।
5 अगस्त : नदिया जिले में फिशिंग कैट की मौत। घटना में 14 लोग शामिल।
Published on:
29 Aug 2020 04:04 pm
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