बागराकोट के मजदूर लरेन्टूस केरकेटा ने बताया कि मुक्ति चायबागान के राई लाईन इलाके में रहती थी और काफी दिनों से कुपोषणजनित बीमारी से ग्रस्त थी। चायबागन खुला होने के बावजूद ठीक समय पर वेतन नहीं मिलने के कारण उसके परिवार की आर्थिक स्थिति खराब हो गई। पैसे के अभाव में उसके परिवार को दाने के लाले पड़ गए थे। मुक्ति को चायबागान के अस्पताल में ले जाया गया, लेकिन वहां पर्याप्त दवाएं नहीं मिली। इस कारण उनका ठीक से इलाज नहीं हो सका और सोमवार सुबह घर में उनकी मौत हो गई।