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पश्चिम बंगाल की सीएम बोलीं, 70 नहीं, अभी मैं 65 साल की हूं

सरकारी दस्तावेजों के अनुसार पांच जनवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को जन्मदिन की बधाई दी लेकिन, ममता ने अपनी उम्र के बारे में एक बार फिर अपनी पुरानी बात दोहराई। बुधवार को उन्होंने कहा कि मैं 70 साल की नहीं, बल्कि अभी मैं 65 वर्ष की हूं। सरकारी प्रमाणपत्र में मेरी उम्र पांच साल बढ़ा दी गई है।

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पश्चिम बंगाल की सीएम बोलीं, 70 नहीं, अभी मैं 65 साल की हूं

पश्चिम बंगाल की सीएम बोलीं, 70 नहीं, अभी मैं 65 साल की हूं

ममता बनर्जी बोली, धर्म, नामकरण में मेरा कोई हाथ नहीं

सरकारी दस्तावेजों के अनुसार पांच जनवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को जन्मदिन की बधाई दी लेकिन, ममता ने अपनी उम्र के बारे में एक बार फिर अपनी पुरानी बात दोहराई। बुधवार को उन्होंने कहा कि मैं 70 साल की नहीं, बल्कि अभी मैं 65 वर्ष की हूं। सरकारी प्रमाणपत्र में मेरी उम्र पांच साल बढ़ा दी गई है। ममता ने अपने जन्मदिन की तारीख के बारे में पहले भी बयान दिया था लेकिन, उन्होंने पहली बार सार्वजनिक तौर पर सरकारी दस्तावेजों में अपनी पांच वर्ष आयु बढ़ाकर लिखे जाने की बात कही हैं। वे धनधान्य' सभागार में आयोजित कार्यक्रम में बोल रही थीं। सरकारी रेकॉर्ड के अनुसार ममता का जन्म 1955 में हुआ था। इस हिसाब से वे 70 वर्ष पार कर गई हैं लेकिन, दादा अजीत बनर्जी को साक्षी मानकर उन्होंने कहा कि अभी वे 65 साल की हैं। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का मानना है कि सभी व्यवसायों की तरह राजनीति में भी सेवानिवृत्ति की आयु होनी चाहिए। राजनीति में सेवानिवृत्ति की आयु सीमा किसी भी स्थिति में 65 से अधिक नहीं होनी चाहिए। हालांकि अभिषेक ने यह भी बताया कि हर चीज में कुछ 'अपवाद' होती है। उन्होंने ममता को अपवादों की सूची में रखा है।

भैया को साक्षी बनाकर वास्तविक उम्र को बताया

ममता ने कहा कि हममें से जिन लोगों ने घर पर जन्म लिया है, उनके लिए यह समस्या है। आज बड़े भैया मेरे सामने हैं। इसलिए मैंने उन्हें साक्षी मानकर ये बात कही। मैंने बहुत पहले अपनी पुस्तक 'एकान्ते' में यह बात लिखी है। बुधवार को जब से ममता ने कहा कि वे 65 वर्ष की हैं। तब से तृणमूल के सूत्र अभिषेक के बयान को हल्के में ले रहे हैं लेकिन, साथ ही वे यह बताना भी नहीं भूलते कि ममता ने ये शब्द तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव के बयान को ध्यान में रखकर नहीं दिया है, क्योंकि ममता खुद कई बार सार्वजनिक रूप से कह चुकी हैं कि उम्र सिर्फ एक संख्या है।

मुझे यह नाम भी पसंद नहीं

इस कार्यक्रम में संतोष ट्रॉफी विजेता बंगाल फुटबॉल टीम के सदस्य उपस्थित थे। मंच पर ममता के भैया और आइएफए अध्यक्ष अजीत बनर्जी भी उपस्थित थे। भाषण की शुरुआत में ही ममता ने अपने भैया को खड़े होने के लिए कहा। उन्होंने अपना परिचय देते हुए कहा कि मुझे अपने जन्मदिन का दिन बिल्कुल पसंद नहीं है। मेरा धर्म, उपनाम, नामकरण में मेरा कोई हाथ नहीं, मुझे यह नाम भी पसंद नहीं है। प्रमाणपत्र में मेरी यही उम्र है। इसे मेरे मां-बाप ने लिखवाया है। मुझे इसके बारे में पता ही नहीं था। जब मैं कॉलेज में थी तो एक दिन मेरे भैया ने मुझसे कहा कि क्या तुम्हें पता है पिताजी ने तुम्हारी और मेरी उम्र में सिर्फ छह महीने का फर्क रखा है। सर्टिफिकेट में तुम्हारी और मेरी उम्र में सिर्फ छह महीने का अंतर है। मैंने जवाब देते हुए कहा कि अच्छा।