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विश्व में पहली बार कोलकाता में होगा योग शिविर और श्रीमद्भागवत कथा

राज्यपाल को योग विशेषांक प्रति भेंट, योग शिविर और श्रीमद्भागवत कथा के ऐतिहासिक संयुक्त आयोजन में आमंत्रित

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कोलकाता. विश्व में संभवतया पहली बार बड़ा बाजार सत्संग भवन में होने वाले योग शिविर और श्रीमद्भागवत कथा के ऐतिहासिक संयुक्त आयोजन में राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी भी शिरकत करेंगे। इसी क्रम में योग के महत्व को जनमानस तक पहुंचाने के उद्देश्य से मुकेश व्यास के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने हिंदी पाक्षिक सनलाइट की ओर से प्रकाशित योग विशेषांक की प्रति राज्यपाल को भेंट की। केंद्रीय रेल राज्य मंत्री-संचार मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मनोज सिन्हा ने कोलकाता में इसका विमोचन गत दिनों किया था। राज्यपाल ने योग पर योगाचार्य राजेश व्यास से विस्तृत की। चर्चा के दौरान व्यास ने गत 12 वर्षो में योग क्षेत्र में किए गए सेवा कार्यो से त्रिपाठी को अवगत कराया। व्यास ने मई में बड़ा बाजार के सत्संग भवन में होने वाले योग शिविर एवं श्रीमद्भागवत कथा के ऐतिहासिक संयुक्त आयोजन में राज्यपाल को आमंत्रित किया। कथा संरक्षक समाजसेवी लक्ष्मीकान्त तिवारी, काशीनाथ पाण्डेय एवं राम गोपाल मिहारिया कार्यकर्ताओ का मार्ग निर्देशन कर रहे हैं। योग विशेषांक के विशिष्ट सहयोगी, संयुक्त आयोजन संरक्षक एवं समाजसेवी सुशील पुरोहित ने इस कार्यक्रम के विषय में विस्तार से राज्यपाल को जानकारी दी। प्रतिनिधि मंडल में सह-सम्पादक मयंक व्यासव आकाश व्यास आदि शामिल थे।

योग का इतिहास
योग परम्परा और शास्त्रों का विस्तृत इतिहास रहा है। हालाँकि इसका इतिहास दफन हो गया है ैअफगानिस्तान, हिमालय की गुफाओं, तमिलनाडु और असम सहित बर्मा के जंगलों की कंदराओं में। जिस तरह राम के निशान इस भारतीय उपमहाद्वीप में जगह-जगह बिखरे पड़े है उसी तरह योगियों और तपस्वियों के निशान जंगलों, पहाड़ों और गुफाओं में आज भी देखे जा सकते है। बस जरूरत है भारत के उस स्वर्णिम इतिहास को खोज निकालने की जिस पर हमें गर्व है। योग का जन्म भारत में ही हुआ मगर दुखद यह रहा की आधुनिक कहे वाले समय में अपनी दौड़ती-भागती जिंदगी से लोगों ने योग को अपनी दिनचर्या से हटा लिया, जिसका असर लोगों के स्वाथ्य पर हुआ। आज भारत में ही नहीं विश्व भर में योग का बोलबाला है और निसंदेह उसका श्रेय भारत के ही योग गुरूओं को जाता है, जिन्होंने योग को फिर से पुनर्जीवित किया। योग साधना के आठ अंग हैं, जिनमें प्राणायाम चौथा सोपान है।

योगासनों के गुण और लाभ
योगासनों का सबसे बड़ा गुण यह हैं कि वे सहज साध्य और सर्वसुलभ हैं। योगासन ऐसी व्यायाम पद्धति है जिसमें न तो कुछ विशेष व्यय होता है और न इतनी साधन-सामग्री की आवश्यकता होती है। योगासन अमीर-गरीब, बूढ़े-जवान, सबल-निर्बल सभी स्त्री-पुरुष कर सकते हैं। आसनों में जहां मांसपेशियों को तानने, सिकोडऩे और ऐंठने वाली क्रियायें करनी पड़ती हैं, वहीं दूसरी ओर साथ-साथ तनाव-खिंचाव दूर करनेवाली क्रियायें भी होती रहती हैं, जिससे शरीर की थकान मिट जाती है और आसनों से व्यय शक्ति वापिस मिल जाती है। शरीर और मन को तरोताजा करने, उनकी खोई हुई शक्ति की पूर्ति कर देने और आध्यात्मिक लाभ की दृष्टि से भी योगासनों का अपना अलग महत्त्व है। योगासनों से भीतरी ग्रंथियां अपना काम अच्छी तरह कर सकती हैं और युवावस्था बनाए रखने में सहायक होती है। पेट की भली-भांति सुचारु रूप से सफाई होती है और पाचन अंग पुष्ट होते हैं। पाचन-संस्थान में गड़बडय़िां उत्पन्न नहीं होतीं। मेरुदण्ड-रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाते हैं और व्यय हुई नाड़ी शक्ति की पूर्ति करते हैं। योगासन पेशियों को शक्ति प्रदान करते हैं। इससे मोटापा घटता है और दुर्बल-पतला व्यक्ति तंदरुस्त होता है।