नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने राज्य सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (डीए) को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा, सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि डीए कोई अनुदान नहीं बल्कि कर्मचारियों का विधिसम्मत और न्यायोचित अधिकार है। भाजपा नेता ने कहा, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बार-बार कहा था कि डीए कर्मचारियों का अधिकार नहीं है, लेकिन आज देश की सर्वोच्च अदालत ने इस दावे को गलत साबित कर दिया। अदालत के निर्देश के बाद अब राज्य सरकारी कर्मचारी अपने न्यायोचित अधिकार के अनुसार महंगाई भत्ता प्राप्त करेंगे। उन्होंने राज्य सरकारी कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि कई वर्षों की प्रतीक्षा और संघर्ष के बाद कर्मचारियों को यह अधिकार मिला है। कर्मचारियों ने ट्राइब्यूनल से लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट तक लगातार कानूनी लड़ाई जीती, लेकिन राज्य सरकार ने उन्हें उनके अधिकार से वंचित करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर देश के बड़े-बड़े वकीलों को खड़ा किया। कर्मचारियों ने धैर्यपूर्वक अपनी जिम्मेदारी निभाई और न्यायिक व्यवस्था पर भरोसा रखते हुए कानूनी मार्ग से संघर्ष जारी रखा। यह जीत राज्य के सरकारी कर्मचारियों के सामूहिक संघर्ष की जीत है।