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बंगाल चुनाव 2026: सीएम ममता बनर्जी को किस बात का लग रहा डर? दिल्ली तक पहुंची BJP के खिलाफ लड़ाई

TMC vs Election Commission: सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि चुनाव आयोग ने उनके प्रतिनिधिमंडल का “अपमान” किया और आयोग भाजपा के इशारे पर काम कर रहा है।

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SIR के खिलाफ ममता ने खोला मोर्चा (Photo-IANS)

West Bengal Assembly Elections 2026: पश्चिम बंगाल में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले राजनीति तेज हो गई है। सीएम ममता बनर्जी लगातार चुनाव आयोग और मोदी सरकार पर लगातार हमला कर रही हैं। इसी बीच सीएम बनर्जी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) अभियान के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने न सिर्फ इस प्रक्रिया को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, बल्कि दिल्ली में निर्वाचन सदन जाकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात के लिए खुद टीएमसी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया।

ज्ञानेश कुमार पर साधा निशाना

मुलाकात के बाद सीएम बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने उनके प्रतिनिधिमंडल का “अपमान” किया और आयोग भाजपा के इशारे पर काम कर रहा है। इससे पहले उन्होंने दिल्ली में बंग भवन के बाहर तैनात पुलिस पर भी आरोप लगाए कि SIR प्रभावित परिवारों को परेशान किया जा रहा है।

ममता को क्या सता रही चिंता?

दरअसल, बंगाल में एक करोड़ से ज्यादा मतदाताओं को तार्किक विसंगतियों के आधार पर सुनवाई के नोटिस मिले हैं। आशंका है कि बड़ी संख्या में नाम अंतिम मतदाता सूची से हट सकते हैं, जिनमें अल्पसंख्यक समुदाय के मतदाता भी शामिल हो सकते हैं। यही ममता बनर्जी की सबसे बड़ी चिंता है। 2011 से सत्ता में आने के बाद टीएमसी को हर चुनाव में मुस्लिम वोटों का मजबूत समर्थन मिलता रहा है, जबकि राज्य की आबादी में मुस्लिमों की हिस्सेदारी करीब 27% है।

चुनावी मोड में आई ममता

14 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद चुनाव तारीखों की घोषणा संभावित है; ऐसे में ममता पूरी तरह चुनावी मोड में आ चुकी हैं। वह SIR विवाद को भाजपा के खिलाफ एक राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रही हैं ताकि बेरोजगारी, उद्योगों की कमी और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर विपक्ष के हमलों को कमजोर किया जा सके।

ममता के सामने और क्या चुनौती

दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के हमलों का भी ममता सामना कर रही हैं। पीएम मोदी ने सिंगुर से टीएमसी सरकार को “एंटी-इंडस्ट्री” बताया, जिसके जवाब में ममता ने हजारों करोड़ की परियोजनाओं की घोषणा की।

इसके साथ ही ईडी की कार्रवाई, संभावित कानूनी संकट और हिंदू मतदाताओं को साधने के प्रयास—इन सभी मोर्चों पर ममता बनर्जी एक साथ जंग लड़ रही हैं। अल्पसंख्यक समर्थन को मजबूत करने और हिंदू वोट बैंक में सेंध लगाने की रणनीति के साथ वह 2026 के चुनाव से पहले पूरी ताकत झोंक चुकी हैं।

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