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चार साल के मासूम के हलक में एक हफ्ते तक अटकी रही ढाई इंच लंबी खुली सेफ्टी पिन, डॉक्टरों ने ऑपरेशन के जरिए निकाली

Kondagaon News: दामोदर मानसिक रूप से कमजोर है। एक हफ्ते पहले उसने गले में दर्द में की बात परिजनों को समझाई। सामान्य समस्या जानते हुए परिवार वालों ने केशकाल के स्वास्थ्य केंद्र में प्राथमिक इलाज शुरू करवाया। लेकिन राहत नहीं मिली।

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 चार साल के बच्चे के गले में फंसी सेफ्टी पिन।

चार साल के बच्चे के गले में फंसी सेफ्टी पिन।

Kondagaon News: केशकाल के 4 साल के दामोदर के परिवार वालों का उस समय होश उड़ गए जब उन्हें पता चला कि उनके बच्चे गले में ढाई इंच लंबी एक खुली हुई सेफ्टी पिन फंसी हुई है वह भी एक हफ्ते से। इसकी जानकारी मिलते ही परिवार मेकाज पहुंचा। मेडिकल कालेज के चिकित्सकों ने बेहद संजीदगी दिखाते इस जटिल सर्जरी को करने सहमति जता दी। मेकाज के डॉक्टरों ने इस आपरेशन को न सिर्फ सफलता पूर्वक अंजाम दिया बल्कि लगातार 72 घंटे तक मरीज की मॉनिटरिंग करते रहे।

दो घंटे चला ऑपरेशन, हुआ डिस्चार्ज
मेकॉज में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में तेजी से सुधार हो रहा है। इस मामले में जैसे ही दामोदर भर्ती हुआ दूसरे दिन उसके ऑपरेशन की तारीख मिली। इस दौरान डॉ. हेमंत और एनिसथिसिया डॉ जी. प्रताप राव ने करीब दो घंटे तक इस ऑपरेशन किया गया। तब जाकर इसे सुरक्षित बाहर निकाला गया। ऑपरेशन के बाद करीब तीन दिन तक उसकी मॉनिटरिंग की गई। अब दामोदर पूरी तरह से स्वस्थ्य है। रविवार को उसे डिस्चार्ज कर दिया।

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ईएनटी विभाग के डॉ. हेमंत ने बताया कि बच्चा उनके यहां 15 फरवरी को आया था। एक्स रे में जैसे ही स्थिति साफ हुई कि गले में सेफ्टी पिन फंसी हुई है, उसे बाहर निकालने के लिए प्रयास शुरू किया गया। इसके लिए ऑपरेशन करने का निर्णय लिया गया। क्योंकि गले में फंसी हुई सेफ्टी पिन खुली हुई थी इसलिए गलती की गुंजाइश बिल्कुल नहीं थी। इसलिए 16 फरवरी को इसका इसोफेगोस्कोपी रिमूअल ऑफ फारेंन बॉडी यानी की इसे निकालने के लिए ऑपरेशन शुरू किया गया। जिसमें बच्चे की जान बच गई। आपरेशन के बाद इस पिन को देख कर डाक्टर भी चकित से रह गए थे।

हफ्ते भर करवा रहे थे गले दर्द का इलाज
दरअसल दामोदर मानसिक रूप से कमजोर है। एक हफ्ते पहले उसने गले में दर्द में की बात परिजनों को समझाई। सामान्य समस्या जानते हुए परिवार वालों ने केशकाल के स्वास्थ्य केंद्र में प्राथमिक इलाज शुरू करवाया। लेकिन राहत नहीं मिली। इसके बाद वे कोंडागांव के जिला अस्पताल में भी पहुंचे लेकिन यहां भी उन्हें राहत नहीं मिली। इस बीच बच्चे के गले में दर्द बढ़ता ही जा रहा था। इसी दौरान वे मेकाज पहुंचे जहां एमआरआई की सलाह दी। इसमें कुछ मेटल का सा नजर आया। इसके बाद एक्सरे निकाला गया तब जाकर तस्वीर साफ हुई कि बच्चे के गले में सेफ्टी पिन फंसी हुई है वह भी खुली हुई।

परिवार वालों को जरूरत है कि वे बच्चों का विशेष रूप से ध्यान दें। सेफ्टी पिन हो या फिर अन्य दवाएं जो बच्चों के लिए खतरनाक हो सकती है, ऐसी चीजों को बच्चों के पहुंच से दूर रखना चाहिए। साथ ही आज के दौर में मोबाइल जैसी चीजों से बच्चों को दूर कर आउट डोर गेम खेलने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। जिससे की बच्चों का बौद्धिक विकास बेहतर तरीके से हो सके। आज के दौर में बच्चों को मैदान तक लेकर जाने की जिम्मेदारी भी परिवार की है क्योंकि मोबाइल गेम व वीडियो गेम जैसी चीजों को खेलकर बच्चों में गुस्सा, जल्द डिप्रेशन आने जैसी स्थिति बन रही है जिसका रिसर्च रिपोर्ट भी सभी के सामने है।

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