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विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है, अब पार्टियों को बचना होगा लंका भेदियों से

अभी तक जिले के दोनों विधानसभा में ऐसी स्थिति निर्मित तो नहीं हुई, लेकिन प्रत्याशी घोषित होने के बाद यह हो सकता है।

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विधानसभा चुनाव

विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है, अब पार्टियों को बचना होगा लंका भेदियों से

रामाकान्त सिन्हा/कोण्डागांव.विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है और राजनीतिक पार्टीयां भी चुनाव लडऩे मैदान में कूदने पूरी तैयारी कर चुकी हैं। अब बस प्रत्याशियों के नाम फाइनल करना शेष रह गया है। और इसके फायनल होते ही सभी अपने-अपने चुनावी प्रचार में जुट जाएंगे। इस दौरान प्रत्याशियों को अपनी लंका के भेदियों को पहचनना होगा। तभी वे अपनी रणनीति में सफल हो पाएंगे। हालंाकि अभी तक जिले के दोनों विधानसभा में ऐसी स्थिति निर्मित तो नहीं हुई, लेकिन प्रत्याशी घोषित होने के बाद यह हो सकता है।

इसी दौरान कई विभीषण भी सामने आते पिछले कुछ चुनावों में देखा गया है।
जिले के केशकाल विधानसभा में कांग्रेस से दो दर्जन से अधिक लोगों ने अपनी दावेदारी पेश की है तो वही भाजपा से आधा दर्जन नेताओं का नाम सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। वहीं कोण्डागांव विधानसभा में एक दर्जन से अधिक कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने अपनी दावेदारी पेश की तो भारतीय जनता पार्टी से केवल दो लोगों ने ही दावेदारी पेश करते हुए अपनी चुनावी रणनीति की तैयारी कर ली है। हालंाकि प्रत्याशी चयन होने के बाद सभी कार्यकर्ता पार्टी के चयनित उम्मीदवार के पक्ष में ही काम करते हैं, लेकिन कौन कब विभीषण बन जाए यह कह पाना संभव नहीं होगा।

गठबंधन का दिखेगा फर्क
हालांकि अभी तक ज्यादातर चुनाव में इन दोनों ही सीटों में भाजपा व कांग्रेस के उम्मीदवार ही विजय होते रहे है। लेकिन इस बार छजग, सीपीआई और बासपा के बीच हुए गठबंधन के चलते विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस व भाजपा दोनों का अच्छी टक्कर मिल सकती है। क्योंकि एक क्षेत्रीय पार्टी के साथ दो राष्ट्रीय पार्टी मिलकर चुनाव लड़ रही हैं।

भाजपा से ज्यादा कांग्रेस को दिक्कत
जिले के इन दोनों विधानसभा में भाजपा से ज्यादा कांग्रेसियों को दिक्कत हो सकती है। क्योंकि पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रहे नरेद्र नेताम ने कांग्रेस छोड़कर जोगी कांग्रेस का दामन थाम लिया है। वहीं एक और वरिष्ट कांग्रेसी ने भी पार्टी से किनारा कर लिया हैं। इससे कहीं न कहीं पार्टी में इसका असर पड़ेगा। हालांकि स्थानीय कांग्रेसी इसे कोई बड़ा फर्क होने से इनकार कर रहे हैं। इनकी माने तो दोनों विधानसभा सीटों के वर्तमान कांग्रेसी विधायको ने जो इलाके में विकास कार्य किए है उसका फल अब जनता देगी और दुबारा कांग्रेस को चुनेगी।