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महिला अत्याचार से जुड़े मामलों की जांच के लिए हैं सिर्फ तीन अधिकारी

पीडि़ता का बयान दर्ज करने के लिए महिला सब इंस्पेक्टर जरूरी
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कोरबा

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Shiv Singh

•

Updated: 21 Aug 2018, 12:49 AM IST

महिला अत्याचार से जुड़े मामलों की जांच के लिए हैं सिर्फ तीन अधिकारी

महिला अत्याचार से जुड़े मामलों की जांच के लिए हैं सिर्फ तीन अधिकारी

कोरबा. करीब एक साल पहले सविता ने (काल्पनिक नाम) परिवार की इच्छा की विपरीत जाकर मनपसंद युवक संग शादी रचाई थी लेकिन चंद साल बाद दोंनो विवाद होने लगे तो सविता ने पति पर अप्राकृतिक यौन संबंध के अलावा दहेज के लिए मारपीट और प्रताडि़त करने का आरोप लगा अर्जी दी है। अर्जी को पढ़कर अफसर परेशान हैं। उनकी चिंता महिला का बयान दर्ज और जांच करने को लेकर है। महिला के आरोपों की जांच के लिए कम से कम सब इंस्पेक्टर रैंक के महिला अफसर का होना जरूरी है। लेकिन कोतवाली थाने में महिला सब इंस्पेक्टर की पोस्टिंग नहीं है। एक महिला हवलदार है, जो अभी ड्यूटी पर थाने से बाहर है। मजबूरी में पीडि़त महिला की परेशानी की जांच के लिए अफसर उस महिला हवलदार को बुलाते हैं। उससे बयान दर्ज करने के लिए कहते हैं।
ऐसी परेशानी से न सिर्फ सविता दो चार हो रही है। बल्कि सविता जैसे कई महिलाएं और नाबालिग लड़कियां भी है, जिनकी परेशानी सविता से मिलती जुलती है। थाने में महिला सब इंस्पेक्टर के नहीं होने से थानेदार हवलदार या सिपाही से बयान दर्ज करा रहे हैं। यह स्थिति तब है, जब सुप्रीम कोर्ट महिलाओं से संबंधित अपराध की जांच के लिए दिशा निर्देश जारी कर चुका है। लैंगिक अपराध से बालकों संरक्षण अधिनियम में किये गए कानूनी प्रवधान के अनुसार 18 साल से उम्र की लड़कियों से संबंधित छेड़छाड़ या दुष्कर्म जैसी अन्य घटनाएं की जांच कौन करेगा इसका स्पष्ट प्रवधान किया गया है। घरेलू हिंसा से संबंधित मामले की जांच के लिए भी गाइड लाइन जारी की गई है।
कहा गया है कि ऐसी गंभीर अपराध की जांच महिला सब इंस्पेक्टर या इससे वरिष्ठ रैंक के अफसर ही करेंगे। वयस्क लड़कियां के संबंध में भी कानूनी प्रावधान है। लेकिन महिला अधिकारियों की कमी से छानबीन में कोताही बरती जा रही है। महिला हवलदार बयान दर्ज कर रही हैं।

आठ महिला हवलदार और 70 महिला सिपाही
जिला पुलिस में एक हजार 40 जवान पदस्थ हैं। इसमें आठ महिला हवलदार और 70 सिपाही हैं जबकि अलग अलग थाने में दर्ज अपराध में से करीब एक तिहाई हिस्सा महिलाओं से संबंधित है।
- लैंगिक अपराध से बालकों का संरक्षण सहित अन्य अधिनियम में महिलाओं से संबंधित गंभीर अपराध की जांच के लिए स्पष्ट गाइड लाइन जारी किया गया है। सब इंस्पेक्टर या इससे उपर रैंक की महिला अफसर ही बयान दर्ज कर सकती है। इसके लिए समय भी निर्धारित है।
शिव नारायण सोनी, अधिवक्ता, कोरबा
- महिला अफसरों की कमी है। इससे थोड़ी परेशानी होती है। नई सूची में महिला अफसर आ सकते हैं। इससे स्थिति में सुधार होगा।
सुरेंद्र साय पैकरा सीएसपी, कोरबा