
राजस्थान की 5 बड़ी सीमेंट कंपनियों ने सरकार को लगाई करोड़ों की चपत, रियायती दर खरीदा डीजल ट्रांसपोर्टर को बेच डाला
-वाणिज्य कर विभाग ने सीमेंट कंपनी समेत पांच बड़ी कंपनियों के खिलाफ की कार्रवाई
कोटा . खनन के लिए रियायती दर पर मिलने वाले डीजल ( Diesel ) को प्रदेश की पांच बड़ी सीमेंट कंपनियों ( Cement companies ) ने ट्रांसपोर्टरों को बेच डाला। वाणिज्य कर विभाग ( Commercial tax department ) को मिली गुप्त सूचनाओं के आधार पर शुक्रवार को 210 से ज्यादा अधिकारियों ने सीमेंट कंपनियों के 30 और ट्रांसपोर्ट कंपनियों के 12 ठिकानों पर छापेमारी की। ( Raid ) फिलहाल कर चोरी की गणना जारी है।
वाणिज्य कर विभाग की एंटीविजन टीम को लगातार गुप्त सूचनाएं मिल रही थीं कि कोटा की जेके सीमेंट ( JK Cement ) समेत प्रदेश की पांच बड़ी सीमेंट कंपनियां जेके लक्ष्मी ( jk lakshmi cement ) , अल्ट्राटेक सीमेंट ( UltraTech Cement ) और श्री सीमेंट आदि के खनन कार्य में लगी मशीनों, वाहनों और पॉवर जनरेशन यूनिटों के लिए रियायती दर पर मिलने वाले डीजल को खरीदकर ट्रांसपोर्ट कंपनियों को अवैध रूप से बेच रही थीं।
सूचनाओं के आधार पर प्राथमिक जांच कराई गई तो प्रदेश के बड़े 12 ट्रांसपोर्टर्स को इन कंपनियों के जरिए रियायती दरों पर मिलने वाले डीजल को बेचने की पुख्ता जानकारी हाथ लग गई। इसके बाद अवैध डीजल खरीदने वाले ट्रांसपोर्टर के 12 और सीमेंट कंपनियों के 30 से ज्यादा ठिकानों पर शुक्रवार को वाणिज्य कर विभाग के 210 से ज्यादा अधिकारियों ने एक साथ छापेमारी की।
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एकसाथ हुई छापेमारी
वाणिज्य कर विभाग के संयुक्त आयुक्त एंटीविजन शक्ति सिंह राठौड़ ने बताया कि रियायती डीजल की अवैध बिक्री की सूचनाओं के सत्यापन के बाद इसे अंजाम दिया गया है। कार्रवाई के दौरान विभागीय अधिकारियों ने डीजल खरीद से जुड़े रिकॉर्ड, कंप्यूटर हार्ड ***** और पेन ड्राइव आदि जब्त किए हैं। कार्रवाई की भनक न लग जाए इसीलिए कोटा में सहायक आयुक्त अनुपम शर्मा समेत विभागीय अधिकारियों के पूरे लवाजमे के साथ छापेमारी की। इसके साथ ही कोटपूतली, गोटन, चित्तौडगढ़़, निम्बाहेड़ा, खुशखेड़ा, रास, सूरतगढ़, जयपुर, व्यावर, सिरोही, भिवाड़ी और उदयपुर में भी एक साथ छापे मारी की गई। कार्रवाई के दौरान मिले दस्तावेजों से करोड़ों रुपए की जीएसटी और वैट चोरी उजागर होने की उम्मीद है।
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सी फार्म से होता था खेल
संयुक्त आयुक्त एंटीविजन ने बताया कि सीमेंट कंपनियां सी फार्म के जरिए रियायती दरों पर पंजाब और हरियाणा से डीजल खरीदती थीं। जिसे वह अपने यहां नियमित काम करने वाले ट्रांसपोर्टर्स को अवैध तरीके से बेच देती थीं। जबकि इसका इस्तेमाल सिर्फ खनन के दौरान पॉवर जनरेशन या काम में लगी हुई मशीनों में ही इस्तेमाल करने का इन्हें अधिकार था।
Published on:
08 Sept 2019 08:00 am
