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Video: यहां ऐसा भी मंदिर है जहां पूरे परिवार के साथ विराजमान हैं भोलेनाथ

शैक्षणिक नगरी कोटा में महाशिवरात्रि पर्व की तैयारियां शुरू हो गई है। शहर में एक अनूठा प्राचीन शिव मंदिर है, जहां भोलेनाथ पूरे परिवार के साथ विराजमान है। मंदिर में भगवान शंकर के साथ मां पार्वती, पुत्र गणेश व कार्तिकेय, देवी सती और पुत्री अशोका सुंंदरी शामिल हैं।

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शैक्षणिक नगरी कोटा में महाशिवरात्रि पर्व की तैयारियां शुरू हो गई है। शहर में एक अनूठा प्राचीन शिव मंदिर है, जहां भोलेनाथ पूरे परिवार के साथ विराजमान है। मंदिर में भगवान शंकर के साथ मां पार्वती, पुत्र गणेश व कार्तिकेय, देवी सती और पुत्री अशोका सुंंदरी शामिल हैं। यह सभी प्रतिमाएं अलग-अलग हैं और मंदिर स्थापना के समय की है। मंदिर की बनावट ऐसी है कि सूर्य की पहली किरण गर्भ गृह में भगवान शिव का अभिषेक करती है। मंदिर के पास चबूतरे पर अनूठा सहस्त्र शिवलिंग है, जिसमें मुख्य शिवलिंग पर 999 छोटे शिवलिंग उत्कीर्ण हैं।

मौर्य शासक शिवगण ने करवाया था मंदिर निर्माण
महंत श्याम गिरी के मुताबिक, कण्व ऋषि आश्रम संवत 738 यानी करीब 1500 साल पहले मौर्य काल के दौरान राजा शिवगण के अधीन आ गया था। राजा शिवगण ने ही यहां मंदिर का निर्माण करवाया था। मंदिर को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने 1972 में अपने अधिकार में ले लिया था। मंदिर परिसर में कुटिला लिपि में लिखा शिलालेख है, मंदिर के इतिहास से जुड़ी जानकारी दी गई है।

कण्व ऋषि की तपोस्थली
महंत ने बताया कि किवंदती के अनुसार, यह स्थान कण्व ऋषि की तपोस्थली रहा है। दुष्यंत-शकुंतला के पुत्र भरत का बचपन यहीं बीता। मंदिर की जगह पहले ऋषि कण्व का आश्रम हुआ करता था। आश्रम में अप्सरा मेनका की पुत्री शकुंतला रहती थी। युवावस्था में राजा दुष्यंत इस आश्रम में पहुंचे। उन्होंने शकुंतला से गंधर्व विवाह किया और शकुंतला ने भरत का जन्म दिया। कुरू वंश में भरत के बाद शांतनु, भीष्म, कौरव व पाण्डव हुए। कौरव पाण्डव की पांचवीं पीढ़ी से इस मंदिर का इतिहास जुड़ा हुआ है।