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चौंकाने वाला खुलासा: इंसान तो दूर अब जानवरों के रहने लायक भी नहीं बचा कोटा

शहर में इंसान तो दूर जानवरों के रहने लायक हालात भी नहीं है। राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एयर और वाटर क्वालिटी की रिपोर्ट में खुलासा हुआ।

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कोटा

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Zuber Khan

Apr 12, 2018

Air And Water Pollution

कोटा . शहर में इंसान तो दूर जानवरों के रहने लायक हालात नहीं बचे हैं। नान्ता टे्रंचिंग ग्राउंड शहर की आबोहवा में धड़ल्ले से जहर घोल रहा है। आलम यह है कि बेतरतीब तरीके से फेंके जा रहे कूड़े का अंबार हवा ही नहीं पानी को भी जहरीला बना रहा है। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (आरएसपीसीबी) की एयर और वाटर क्वालिटी मॉनीटरिंग की बुधवार को आई रिपोर्ट से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।

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नगर निगम ने नान्ता रोड पर 16.3 हैक्टेयर इलाके को वर्ष 2002 में ट्रेंचिंग ग्राउंड में तब्दील कर दिया। इसके चारों और 8-8 मीटर ऊंची दीवारें और 4 से 5 मीटर की ग्रीन बेल्ट विकसित करने के साथ ही कूड़े को ऑर्गेनिक, अनऑर्गेनिक और बायोवेस्ट के आधार पर छांटकर अलग-अलग हिस्सों में फेंकने का हलफनामा दिया। इतना ही नहीं कूड़ा डालने से पहले ट्रेंचिंग ग्राउंड की जमीन पर सीमेंटेड फ्लोर बनाने और कूड़ा फेंकने के बाद रोजाना उसे मिट्टी से दबाना भी था, लेकिन नगर निगम 16 साल बाद भी इनमें से कोई एक शर्त तक पूरी नहीं कर सका।

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शिकायतों का अंबार
ट्रेंचिंग ग्राउंड में अक्सर आग लगने से उठने वाले धुएं, बदबू और गंदगी के गुबार से आजिज आकर नान्ता रोड से लेकर कुन्हाड़ी तक के लोगों ने आरएसपीसीबी के दफ्तर में शिकायतों का अंबार लगा दिया। बोर्ड ने प्रदूषण के स्तर का आकलन करने के लिए ट्रेंचिंग ग्राउंड और नान्ता इलाके से 9 मार्च को अंडर ग्राउंड वाटर और 09 मार्च व 28 मार्च को हवा के नमूने लिए। इनका परीक्षण करने के बाद जब बुधवार को रिपोर्ट जारी की तो हालात बेहद बदतर निकले।

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हवा में घुला जहर
शहर से रोजाना निकलने वाले 551 मैट्रिक टन कूड़े को छांटे बगैर निगम इसी ट्रेंचिंग ग्राउंड पर फेंक देता है। इस कूड़े में निकलने वाली मीथेन गैस जरा सा तापमान बढ़ते ही आग पकड़ लेती है और पूरा इलाका जहरीले धुएं की चपेट में आ जाता है। धुएं के साथ ही संक्रमित बारीक कण हवा के साथ उड़कर लोगों की सांसों में जहर घोल रहे हैं। जांच के दौरान आरएसपीसीबी को ट्रेंचिंग ग्राउंड के आसपास की हवा में खतरनाक पार्टिकुलेट मैटर (पीएम-10) की मात्रा मानकों से नौ गुना ज्यादा मिली।

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आरएसपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी अमित शर्मा ने बताया कि लगातार शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद मार्च महीने में पीसीबी ने नान्ता ट्रेंचिंग ग्राउंड और बायोलॉजिकल पार्क से हवा और पानी के नमूने लिए। जो रिजल्ट आए हैं वे बेहद गंभीर हैं। कार्रवाई के लिए जयपुर मुख्यालय से निर्देश मांगा गया है।

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हाथ लगाने लायक नहीं है पानी
ट्रेंचिंग ग्राउंड में 16 साल से सड़ रहे कूड़े का जहर अब जमीनी पानी में भी घुलने लगा है। कठोरता तीन गुना से भी ज्यादा होने के कारण इस इलाके का पानी इंसान तो दूर जानवरों के पीने लायक भी नहीं बचा है। पानी की गुणवत्ता इस कदर खराब हो चुकी है कि इससे कपड़े धोना तो दूर फर्श और गाड़ी तक साफ नहीं की जा सकती। पानी की तिगुनी से ज्यादा हो चुकी लवणता नमक जैसी सफेद पर्त जमा देती है। टीडीएस, क्लोराइड और केल्शियम की मात्रा भी जानलेवा स्तर तक जा पहुंची है।