50 हजार से ज्यादा छोटी-बड़ी प्रतिमाओं का हुआ विसर्जन
कोटा. चतुर्दशी का अनन्त उत्साह-उमंग-उल्लास, जोश-जुनून-जज्बा और सेवा-समर्पण-सैलाब...गणपति बप्पा की मनभावन झांकियां, अगाध आस्था, श्रद्धा और भक्ति का भाव, वक्रतुंड महाकाय, सूर्यकोटि समप्रभ:.., गच्छ गच्छ सुरश्रेष्ठ, स्वस्थाने परमेश्वर..., यत्र ब्रह्मादयो देवा:, तत्र गच्छ हुताशन... जैसे मंत्रों की गूंज। जयकारे, भक्ति संगीत के सुर छेड़ती मंडलियां, डीजे पर देवा श्री गणेशा...तो कहीं देवा ओ देवा, गणपति अपने गांव चले...सरीखे भजनों की रसधार, डांडिया खड़काती भक्तों की टोलियां, करतब दिखाते अखाड़ेबाज