
कांग्रेस के राज में भी भाजपा के इस बाहुबली का सिक्का कायम, एक साल बाद भी बूंदी पुलिस खौफजदा
बूंदी. जांच, फिर जांच....। पुलिस पीडि़त पक्ष को आठ बार बयान ले चुकी है, लेकिन आरोपियों से एक बार भी पूछताछ नहीं हुई। बूंदी पुलिस दबंगों के आगे नतमस्तक बनी हुई है। तालेड़ा थाना क्षेत्र के बहुचर्चित बंशीलाल माली ( Banshi lal Suicide Case ) सुसाइड केस में भी कुछ ऐसा ही है। बंशीलाल को सुसाइड किए एक वर्ष पूरा हो गया, लेकिन पीडि़त परिवार को न्याय नहीं मिला है। पुलिस आरोपियों ( Bundi Police ) को गिरफ्तार करना तो दूर अभी जांच भी पूरी नहीं कर पाई है। भाजपा नेता और पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल (Ex BJP MLA Prahlad Gunjal ) का भाई श्रीलाल इस मामले में आरोपी होने से अब यही प्रतीत हो रहा है कि पूर्व विधायक की दबंगई के आगे पुलिस ने हथियार डाल दिए हैं।
बूंदी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल इस लिए भी खड़े हो रहे हैं कि पीडि़त परिवार को पूछताछ के लिए आठ बार बुला लिया गया, लेकिन आरोपियों को एक बार भी बूंदी तक बुलाने की जहमत नहीं उठाई गई है। बंशीलाल की पत्नी और उसके दोनों बच्चों का तो मानो अब कानून पर से भरोसा ही उठ गया है। बंशीलाल की 21 मई 2018 को मौत हो गई थी।
एएसपी की जांच डीएसपी से करा रहे सत्यापित
पुलिस के अंदरखाने चर्चा यह भी है कि इस मामले में एफआर लगाने की तैयारी की जा रही है। पुलिस अब नहीं चाहती कि यह मामला आगे बढ़े। बूंदी पुलिस इस मामले की पूर्व में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक से जांच करा चुकी, अब जांच को पुलिस उपअधीक्षक स्तर के अधिकारी से सत्यापित करा रही है।
पहले ही करा चुके एफएसएल
बूंदी पुलिस बंशीलाल के पास मिले सुसाइड नोट की पहले ही एफएसएल जांच करा चुकी, जिसमें इस बात की पुष्टि हो चुकी कि बंशीलाल ने मरने से पहले यह सुसाइड नोट लिखा था। जब पुलिस के पास रिपोर्ट पहुंची तो आरोपियों को गिरफ्तार करने की जगह प्रकरण को रफादफा करने में जुट गए। बाद में मंत्री शांति धारीवाल ने पड़ताल की तब पुलिस ने इस बात का खुलासा किया।
आत्महत्या के सिवाए दूसरा रास्ता नहीं बचा था
बंशीलाल ने सुसाइड नोट में लिखा था कि 'कोटा सरस डेयरी के अध्यक्ष श्रीलाल गुंजल, सुपरवाइजर प्रभुलाल गोचर, आरपी गोपाल ने लाखों रुपए लिए और बीएमसी (बल्क मिल्क कोलर) दी। कई बार बीएमसी को बंद कर दिया। वापस चालू करने के लिए रुपए देता रहा। ऐसे में कहां तक पैसे देते रहता। मना किया तो फिर से बीएमसी को ले जाने का आदेश निकाल दिया। ऐसे में आत्महत्या के सिवाए दूसरा रास्ता नहीं बचा था। बंशीलाल की तालेड़ा-पाटन तिराहे पर दुग्ध डेयरी थी।
पूर्व में की गई जांच को एससी-एसटी सेल के पुलिस उपअधीक्षक से सत्यापित करा रहे हैं। जांच पूरी होने पर ही कुछ हो पाएगा।
सतनाम सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, बूंदी
इंतजार में हैं कि दोषियों को सजा मिलेगी। बेटा खो दिया इसका गम तो बहुत है, लेकिन पुलिस इस प्रकार से कार्रवाई नहीं करेगी यह भरोसा नहीं था। अभी हमने हिम्मत नहीं हारी है। पुलिस इन्हें कितना भी बचा लें बेटे को मरने पर मजबूर करने वालों को जेल जाने की आस नहीं छोड़ी है।
राधेश्याम सैनी (बंशीलाल के पिता)
यह था मामला
नयाबरधा गांव निवासी डेयरी संचालक बंशीलाल माली ने 19 मई 2018 को अज्ञात जहरीला पदार्थ खा लिया था। उसका तीन दिन तक कोटा के एमबीएस अस्पताल में उपचार के दौरान 21 मई की दोपहर को मौत हो गई। इस मामले में पिता राधेश्याम सैनी ने 22 मई 2018 को तालेड़ा आकर थाने में रिपोर्ट और बंशीलाल का लिखा सुसाइड नोट सौंपा। पुलिस ने इसी रिपोर्ट के आधार पर कोटा सरस डेयरी अध्यक्ष श्रीलाल गुंजल, सुपरवाइजर प्रभुलाल गोचर, लेसरदा निवासी आरपी गोपाल गुर्जर के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया था।
Published on:
17 May 2019 08:00 am

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