
कोटा . आग की लपटों में जिंदा जले भगवानदास करीब डेढ़-दो साल से लकवाग्रस्त थे। महावीर नगर विस्तार योजना स्थित मकान में वे अपनी पत्नी व बेटी के साथ रहते थे। उनके दो बेटे और बहू अलग रहते थे। घटना के कुछ समय पहले बेटी ने उन्हें खाना खिलाया था। इसके बाद वो अपने पार्लर और पत्नी दूसरे के घरों में खाना बनाने चली गई।
घर में बुजुर्ग के अलावा कोई नहीं होने के कारण मकान पर ताला लगाकर चले गए। भगवानदास मकान की पहली मंजिल पर बनी टापरी में रहते थे। यहां उनके लिए बेड व टीवी लगी हुई थी। अचानक शोर्ट सर्किट से लकड़ी से बनी टापरी में आग लग गई और देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। लकवा होने के कारण वे आग देखकर भी ना चिल्ला सके और ना ही दूर हट सके। बेबस वहीं मौत का निवाला बन गए। जब तक पड़ोसी मदद को पहुंचे तब तक बहुत देर हो चुकी थी। पत्नी और बेटी को घटना का पता लगा तो उनका रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
अलग रहते हैं बेटे-बहू
परिजनों ने बताया कि मृतक भगवानदास के दो बेटे और चार बेटियां हैं। दोनों बेटे मनोज व लखन महावीर नगर में ही उनसे अलग रखते हैं। तीन बेटियों की शादी हो चुकी है। वे पत्नी अनिता व छोटी बेटी ललिता के साथ रहते थे। घटना के वक्त पत्नी दूसरे घरों में खाना बनाने और बेटी ललिता अपने पार्लर गई थी। पिता की मौत का पता चलने पर उसका रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
आंखों देखी: मकान से उठा धुआं तो पता चला
पड़ोसी की छत से जाकर बुझाई आगसामने रहने वाले महेश डोलानी ने बताया कि सुबह 11.30 बजे करीब घर पर नहा रहे थे। उनका भाई बाहर खड़ा हुआ था। उसने सामने के मकान की छत से धुआं उठते देखा। वे उस मकान में गए तो वहां ताला लगा हुआ था। उन्होंने पड़ोसियों के साथ मिलकर मकान का ताला तोड़ा और अंदर गए, लेकिन धुआं अधिक होने से सीढिय़ों से ऊपर जाना संभव नहीं था। बाद में पड़ोसी की छत से जाकर लोगों की मदद से पानी डालकर आग बुझाने का प्रयास किया। नजदीक जाकर देखा तो भगवान दास जमीन पर पड़े हुए थे। टीवी और अन्य सामान जले हुए थे। इस दौरान पुलिस और नगर निगम की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। सभी ने मिलकर आग बुझाई और बुजुर्ग को बाहर निकाला, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
Published on:
08 Feb 2018 09:59 am
बड़ी खबरें
View Allकोटा
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
