
BIG News: राजस्थान में तेज धमाके के साथ चलती कार के फूट रहे टायर, ये सावधानी रख बचाएं परिवार की जान
दीपक शर्मा @ कोटा.
लंबे सफर पर जाने से पहले कार की हवा-पानी चेक करने की आदत अच्छी है, लेकिन तेज गर्मी के मौसम ये आदत आपके सफर की हवा भी निकाल सकती है। गर्मी के मौसम में हाइवे पर होने वाले हादसों में अचानक वाहन का टायर फटना भी गैरजरूरी कारण बन गया है। सामान्यत: कार के टायरों में निर्धारित मापदंडों के अनुरूप हवा भरी जाती है, लेकिन गर्मी में हाइवे पर लंबे सफर में ये पर्याप्त हवा टायरों के लिए गलफांस बन जाती है। इसी का नतीजा है कि तेज रफ्तार कार में टायर फट ( car tire cracked ) जाते हैं और हादसे का सबब बनते हैं।
ये हुए हादसे
टायर फटा, 50 मीटर घिसटती गई पूर्व सांसद की कार
पिछले दिनों सीकर जिले के पलसाना के पास हुए एक सड़क हादसे ( road accident ) में पूर्व सांसद अश्क अली टांक बाल-बाल बचे। टांक जयपुर से सीकर की तरफ आ रहे थे। पलसाना के पास उनकी कार का टायर फट गया और कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर पर चढ़ गई। कार में सवार टांक व चालक के हल्की चोट लगी।
कार पलटी, 4 घायल
लाखेरी से तेज रफ्तार में कोटा आते समय रास्ते में टायर फट जाने से कार पलट गई। हादसे में कार में सवार चार लोग घायल हो गए।
सड़क से उतरी कार
कोटा जिले के इटावा क्षेत्र में तेज रफ्तार कार टायर फटने से सड़क से उतर ड्रेन में जा गिरी। हादसे में तीन लोग गंभीर घायल हो गए।
इसलिए फटते हैं टायर...
1. ग्रिप घिस जाने के बाद तेज रफ्तार में छोटा पत्थर, गड्ढे या कट में गिरने पर टायर फट जाते हैं।
2. उबड़-खाबड़ रास्तों पर कटे-फटे टायर के साथ तेज रफ्तार हादसे का सबब बन जाती है।
3. टायरों में मापदंड के अनुसार निर्धारित हवा लंबे सफर में घर्षण के कारण गर्म होकर ज्यादा दबाव बनाती है और टायर फट जाता है।
4. अधिकांश हाइवे सीसीरोड में तब्दील हो चुके हैं। ऐसे रास्तों पर टायरों में ज्यादा घर्षण होता है।
5. कम गुणवत्ता के टायर या निर्धारित किलोमीटर के बाद भी लंबे समय तक टायर न बदलवाना।
ये रखें ध्यान
1. लंबे सफर पर जाएं तो टायरों में निर्धारित से थोड़ी कम हवा भरवाएं।
2. 2. निर्धारित किलोमीटर चलाने के बाद या कटे-फटे टायर जरूर बदलवा लें।
3. टायर का जोड़ा ही बदलना चाहिए, वरना टायर का एलाइनमेंट और व्हील बैलेसिंग बिगडऩे की आशंका रहती है।
4. हार्ड रबर के बजाए सॉफ्ट रबर के टायर ज्यादा प्रेशर सहन करते हैं। ट्यूबलेस टायर ऐसे मामलों में ज्यादा सुरक्षित होते हैं।
5. निर्धारित साइज के अनुसार ही टायर डलवाएं। गाड़ी के मॉडिफेशन और लुक के चक्कर में निर्धारित साइज से बड़े टायर भी हादसे को न्योता देते हैं।
डराते हैं ये आंकड़े
एक रिपोर्ट मुताबिक, हर साल 78 हजार से ज्यादा हादसे टायर फटने की वजह से होते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकांश हादसे पिछला टायर फटने की वजह से होते हैं, क्योंकि चालक वाहन से नियंत्रण खो देता है।
एक्सपर्ट व्यू
अक्सर गर्मी के दिनों में टायर में हवा का दबाव बढऩे से हीट जनरेशन बढ़ जाता है, इससे टायर फटने की संभावना बढ़ जाती है। वहीं हवा का दबाव कम रहने से टायर के फेब्रिक और बीडवायर पर लोड आने से पंक्चर और टायर फटने का डर रहता है। टायर पर थ्रेड वियर इंडिकेटर (टीडब्ल्यूआई) का चिन्ह होता है, वहां तक यदि टायर घिस जाए तो तुरंत इसे रिपेयर करवाएं या बदल दें। कभी भी ट्यूब वाले रिम पर ट्यूबलेस टायर न चढ़वाएं। पहियों का अलाइनमेंट तथा बैलेंस समय-समय पर चेक जरूर करवाएं। ट्यूब में 3 मिमी से बड़े कट पर ट्यूब बदल लेनी चाहिए।
अर्पित शर्मा, ऑटोमोबाइल इंजीनियर
Published on:
18 May 2019 01:02 pm

बड़ी खबरें
View Allकोटा
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
