
राज्य मानवाधिकार आयोग ने दिया आदेश, लकवाग्रस्त महिला को दिए जाएं 50 हजार रुपए
जयपुर. राज्य मानवाधिकार आयोग ने कोटा के एमबीएम अस्पताल में चूहे के आंख कुतरने का शिकार हुई लकवाग्रस्त महिला को 50 हजार रुपए क्षतिपूर्ति पाने का हकदार माना है। इसके लिए आयोग ने सिफारिश की है कि पीडि़ता को दो माह में राशि का भुगतान किया जाए। क्षतिपूर्ति राशि में से आधी राशि पेस्ट कंट्रोल वाली फर्म व आधी राशि अस्पताल प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों के वेतन से वसूल की जाए।
आयोग अध्यक्ष न्यायाधीश जीके व्यास ने कोटा के एमबीएस अस्पताल में चूहे के लकवाग्रस्त महिला की आंख कुतरने की घटना को लेकर दर्ज मामले को निस्तारित करते हुए यह आदेश दिया। आयोग ने कहा कि प्रशासनिक लापरवाही व ठेकेदारों की लापरवाही के कारण महिला को वेदना झेलनी पडी़। इस तरह के मामले में मानवाधिकार आयोग मूक दर्शक नहीं रह सकता। इस अमानवीय घटना के कारण पीडि़ता रूपवती को जो कष्ट हुआ, उसके लिए वह क्षतिपूर्ति पाने की हकदार है।
यह दिए निर्देश
- अस्पताल अधीक्षक व प्रमुख स्वास्थ्य सचिव पीडि़ता को दो माह में 50 हजार रुपए का भुगतान करें।
- प्रमुख स्वास्थ्य सचिव पेस्ट कंट्रोल हेल्पलाइन सर्विस फर्म से 25 हजार व अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारियों के वेतन से 25 हजार रुपए वसूलने को स्वतंत्र।
- ऐसी घटनाओं पर नियमित कार्रवाई की जाए
यह था मामला
गौरतलब है कि जीबीएस सिंड्रोम से पीडि़त रूपमती (30) एमबीएस अस्पताल में 45 दिन से भर्ती थी। महिला के पति ने लकवे का अटैक आने पर उसे हॉस्पिटल में भर्ती करवाया था। वह न्यूरो वार्ड में भर्ती थी तथा वेंटिलेटर पर थी। गर्दन तक नहीं हिला सकती थी। 16 मई की रात अस्पताल में चूहे ने उसकी आंख कुतर दी थी। राज्य मानवाधिकार आयोग ने इस घटना को लेकर प्रसंज्ञान लेते हुए कोटा कलक्टर व सीएमएचओ से जवाब मांगा था।
Published on:
08 Jun 2022 04:53 pm
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