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‘वंदे मातरम्’ की गूंज से आज सजेगा कोटा विश्वविद्यालय का मंच

कोटा

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Abhishek Gupta

Mar 13, 2026

संगीतज्ञ पंडित गौतम काले, डॉ. पामिल मोदी

संगीतज्ञ पंडित गौतम काले, डॉ. पामिल मोदी

Kota News: कोटा विश्वविद्यालय के भारतीय ज्ञान परम्परा प्रकोष्ठ एवं संगीत विभाग के संयुक्त तत्वावधान में शताब्दी स्वर- वंदे मातरम् कार्यक्रम का आयोजन शनिवार को किया जाएगा। डीन पीजी स्ट्डीज प्रो.घनश्याम शर्मा ने बताया कि कोटा ​विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. भगवती प्रसाद सारस्वत के मार्गदर्शन में यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय परिसर स्थित फार्मेसी विभाग के सेमिनार हॉल में सुबह 10.30 बजे से होगा। इस अवसर पर संगीतज्ञ पंडित गौतम काले एवं उनका समूह (इंदौर) तथा डॉ. पामिल मोदी एवं उनका समूह देशप्रेम से प्रेरित गीतों की प्रस्तुति देंगे।

कुलगुरू सारस्वत ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य स्वतंत्रता आंदोलन की गौरवपूर्ण परंपरा, राष्ट्रभक्ति और भारतीय सांस्कृतिक चेतना को संगीत के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। कार्यक्रम में वंदे मातरम् सहित देशभक्ति से ओतप्रोत रचनाओं का सामूहिक गायन और सांस्कृतिक प्रस्तुति दी जाएगी।

कार्यक्रम के संयोजक डॉ. सुशील कुमार शर्मा ने बताया कि आयोजन समिति की ओर से तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया। आयोजन समिति सचिव संतोष कुमार मीणा व सह संयोजक डॉ. विक्रांत शर्मा ने बताया कि दोनों प्रसिद्ध कलाकर इंदौर एवं मोहनलाल सुखाडि़या विश्वविद्यालय उदयपुर से आ रहे है।

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45 करोड़ की सड़क एक साल में दूसरी बार टूटी, गुणवत्ता पर सवाल यपाटन मार्ग पर करीब 45 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 22.50 किलोमीटर लंबी सड़क एक वर्ष के भीतर दूसरी बरसात भी नहीं झेल पाई। सड़क एक साल में दूसरी बार क्षतिग्रस्त हो गई है, जिससे निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस बार सुवासा, बाजड और जमीतपुरा गांव के बीच करीब 15 स्थानों पर डामर जगह-जगह से उखड़ गया है और गिट्टी बाहर निकलने लगी है। क्षतिग्रस्त सड़क पर पैचवर्क की मांग को लेकर ग्रामीणों ने शनिवार को सुवासा कस्बे में विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर बने गहरे गड्ढों के कारण विशेष रूप से रात्रि के समय वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अंधेरे में गड्ढे दिखाई नहीं देने से आए दिन दोपहिया और चारपहिया वाहन चालक गिरकर चोटिल हो रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन और सार्वजनिक निर्माण विभाग से तत्काल पैचवर्क और सड़क की स्थायी मरम्मत कराने की मांग की है। जानकारी के अनुसार, तालेड़ा से केशोरायपाटन तक सड़क निर्माण के लिए 45 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। निर्माण कार्य 15 अगस्त 2022 से शुरू हुआ था और इसे सितंबर 2023 तक पूरा किया जाना था, लेकिन सड़क के दोनों ओर लगभग डेढ़ मीटर पटरी निर्माण का कार्य अभी भी कई स्थानों पर अधूरा पड़ा है। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क पर लगभग एक वर्ष पूर्व डामरीकरण किया गया था, लेकिन दिसंबर 2025 में सुवासा, बाजड और जमीतपुरा के बीच करीब 20 स्थानों पर सड़क उखड़ गई थी। उस समय संवेदक द्वारा पैचवर्क कर सड़क की मरम्मत की गई थी, लेकिन मरम्मत कार्य की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं रही। परिणामस्वरूप जुलाई 2026 में दूसरी बरसात शुरू होते ही सड़क फिर से उखड़ गई और कई स्थानों पर गिट्टी निकलने लगी है। लगातार टूट-फूट के कारण सड़क धीरे-धीरे बड़े गड्ढों में तब्दील होती जा रही है। इस मार्ग से प्रतिदिन करीब तीन हजार से अधिक छोटे-बड़े व भारी वाहन गुजरते हैं। यह सड़क नेशनल हाईवे 52 व मेगा हाईवे को जोड़ती है। सड़क की बदहाल स्थिति के कारण वाहन चालकों, किसानों, मजदूरों और आसपास के गांवह/वें के लोगों को रोजाना परेशानी झेलनी पड़ रही है। कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। अभिषेक गुर्जर, सहायक अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग, तालेड़ा ने बताया कि तालेड़ा से सुवासा के बीच कुछ स्थानों पर सड़क क्षतिग्रस्त हुई है और सड़क निर्माण का कुछ कार्य अभी शेष है। संवेदक का पूरा भुगतान अभी नहीं हुआ है। क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत करने के निर्देश संवेदक को दे दिए गए हैं। सड़क वर्तमान में गारंटी अवधि में है और इसकी मरम्मत संवेदक द्वारा ही कराई जाएगी।

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