कोटा.. कोटा में डेंगू का कहर लगातार बढ़ रहा है। रोजाना बड़ी संख्या में डेंगू मरीज मिल रहे हैं। ऐसे में राज्य सरकार भी अलर्ट मोड पर है। कोटा में शुक्रवार को डेंगू के 29 मरीज मिले। इनमें 27 शहर व 2 ग्रामीण में मिले। स्क्रब टायफस का शहर में 1 मरीज मिला है। व्यस्क से लेकर बच्चे तक डेंगू की चपेट में है। जेके लोन अस्पताल अधीक्षक डॉ. आशुतोष शर्मा ने बताया कि अस्पताल में डेंगू से बचाव को लेकर वार्ड के बेड को मच्छरदानी से कवच किया हुआ है। अस्पताल की ओपीडी में 20 फीसदी संख्या बढ़ गई है। जहां पर पूरी सावधानी बरती जा रही है। मच्छरदानी में बच्चों व गर्भवती महिलाओं का इलाज किया जा रहा है, ताकि डेंगू मच्छर से अन्य मरीजों में इंफेक्शन नहीं फैले। इसके अलावा कूलरों में सुबह-शाम दवा डाली जा रही है। 8 बेड पर मरीजों से फुल हैं। इनमें डेंगू व डेंगू लाइक इलनेस वाले मरीज भर्ती हैं। उन्होंने बताया कि सभी को पूरी सावधानी बरतने की आवश्यकता है, ताकि मच्छर जनित रोग से बचा जा सके।
चिकित्सा निदेशालय ने आदेश जारी कर कोटा में डेंगू नियंत्रण को लेकर कंसलटेंट एमएण्ड चैनरूप सोनी, एपिडिमियोलॉजिस्ट जयपुर द्वितीय डॉ. जालमसिंह राठौड़ व अभिमन्यु सिंह को लगाया है। इधर, चिकित्सा विभाग भी एक्शन मोड पर आ गया है। सीएमएचओ डॉ. जगदीश सोनी ने जवाहर नगर थानाधिकारी व नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखकर चालान कार्रवाई के लिए एक टीम सदस्य की मांग की। अब यदि लोगों ने घरों में टंकियों, कूलरों में जमा पानी को तुरंत खाली नहीं किया तो लोगों पर एपिडेमिक एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। पानी खाली नहीं करने पर 500 रुपए जुर्माना किया जाएगा। सीएमएचओ ने बताया कि कोटा शहर में डेंगू रोकथाम के लिए चलाए जा रहे अभियान में घरों के बाहर रखी पशुओं के पीने की टंकियों में लार्वा मिल रहा है। जिसे चिकित्सा विभाग की टीमें ने नष्ट कर रही है, लेकिन आमजन को भी अब जागरूक होकर आगे आना होगा और अपने घरों के बाहर रखी टंकियों, कूलरों को साफ करना होगा।
अधिकतर मरीज में डीईएन-1 व 2 मिला
एलाइजा पॉजिटिव मरीजों के सीमन का पीसीआर टेस्ट लगाकर उनका सिरोटाइप डिटेक्ट करने पर पाया गया कि केवल 12 प्रतिशत मरीजों में डीईएन-2 स्ट्रेन पाया गया। यहां पर यह बताना भी उचित होगा कि डीईएन-1 की तीव्रता डीईएन-2 से कम होती है।
डॉ. दिनेश वर्मा, आचार्य एवं विभागाध्यक्ष माइक्रोबायोलॉजी विभाग चिकित्सा महाविद्यालय कोटा
अभी 65 फीसदी मरीज डेंगू के भर्ती
60 से 65 प्रतिशत मरीज डेंगू या डेंगू जैसी बीमारी से संबंधित भर्ती हैं। अभी तक 2-3 मरीज डेंगू शॉक सिंड्रोम केे भर्ती हुए हैं, जो भी उपचार के बाद स्वस्थ्य होकर घर चले गए। डेंगू से ग्रसित मरीज को काली लेटरिन आना, यूरिन एवं मसूड़ों से ब्लड आना पाया गया। अभी तक 16-20 मरीज को आरडीपी/एसडीपी देकर ठीक किया गया।
डॉ. पंकज जैन, सह आचार्य मेडिसिन विभाग, नवीन चिकित्सालय कोटा
किसी अस्पताल में डेंगू से मौत दर्ज नहीं
कोटा मेडिकल कॉलेज से संलग्न सभी चिकित्सालयों में डेंगू एवं उस जैसे लक्षण वाली बीमारी से ग्रसित मरीजों के उपचार की सम्पूर्ण व्यवस्था सुचारू रूप से चल रही है। सभी चिकित्सालय फुल हैं। वर्तमान में चिकित्सा महाविद्यालय से संलग्न किसी भी चिकित्सालय में डेंगू से ग्रसित बीमारी से किसी भी मरीज की मृत्यु दर्ज नहीं हुई है।
डॉ. संगीता सक्सेना, प्रधानाचार्य एवं नियंत्रक, चिकित्सा महाविद्यालय