कोटा के कायन हाउस व गोशालाओं में गोवंशों की बेकद्री हो रही है। सोमवार शाम एक साथ 6 गोवंशों की मौत हो गई।
कोटा. नगर निगम की लापरवाही के कारण कायन हाउस गौवंश के रखरखाव की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण दुर्दशा के शिकार हो रहे हैं। सोमवार रात को भी तीन बछड़े समेत छह गौवंश की अकाल मौत हो गई है। बीमार गायों को कव्वों से बचाने के लिए जालियां लगा रखी थी, लेकिन उसमे नहीं रखा जाता है। जिंदा बीमार गायों की आंखें नौच लेते है। ऐसे मामले पहले भी आए थे, उसके बाद भी कोई सुधार नहीं हुआ। कायन हाउस के कर्मचारी लापरवाही पर पर्दा डालने के लिए बीमार गायों के मुंह को ही बोरे से ढक देते हैं। कायन हाउस की क्षमता 250 गोवंश रखने की है, लेकिन अभी निगम ने शहर में आवारा मवेशियों को पकडऩे का अभियान चला रखा है। इस कारण क्षमता से दुगुने मवेशी रखने पड़ रहे हैं। मंगलवार को कायन हाउस में 400 गोवंश रखे है।
क्षमता से अधिक गोवंश रखने से बीमार मवेशी एक बार गिरने के बाद उठ नहीं पाता है। गाय और सांड उसके ऊपर से निकल जाते हैं, इससे वह घायल हो जाता है। जबकि बीमार बछड़ों और गायों को रखने के लिए अलग शेड बना रखा है, लेकिन कर्मचारी ध्यान नहीं देते हैं। इस कारण गोवंश तड़प-तडप कर दम तोड़ देते हैं। बंधा धर्मपुरा गौशाला में भी गोवंश को क्षमता से अधिक भरकर रखा गया है। इस कारण वहां भी बारिश में गौवंश के मरने का सिलसिला जारी है।
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कायन हाउस की नहीं बनी दीवार
कायन हाउस की क्षमता बढ़ाने के लिए एक दीवार बनाई जानी है और शेड लगाने हैं, इसके लिए बजट भी स्वीकृत हो गया है, लेकिन छह माह से काम अटका पड़ा है। पिछले दिनों उपायुक्त ने एक्सईएन ए.क्यु. कुरैशी को दीवार का काम शुरू करने के निर्देश दिए थे। कुरैशी का कहना है कि बारिश के कारण निर्माण कार्य में दिक्कत आ रही है। गोशाला समिति के अध्यक्ष पवन अग्रवाल ने उनके वार्ड के विकास कार्यों के लिए स्वीकृत राशि में पांच लाख रुपए कायन हाउस में आवश्यक कार्यों के लिए दिए थे, लेकिन उसका भी अभी तक काम शुरू नहीं हुआ है।
बीमार गौवंश को कव्वों से बचाने के लिए जालीदार शेड जगह बना रखी है, उसमें ही बीमार गोवंश को रखने को कहा है। अभी अधिक गोवंश आने के कारण उचित देखभाल नहीं हो रही है। बुधवार को इस बारे में आयुक्त और उपायुक्त से बात करेंगे।
पवन अग्रवाल, अध्यक्ष गोशाला समिति