
कोटा
बारिश शुरू होने के बाद ट्रेक किनारे घास उगने से पटरी पर आने वाले मवेशियों की संख्या बढ़ गई है। इस कारण ट्रेनों को रास्ते में रोकना पड़ रहा है। मवेशियों के टकराने के कारण ट्रेन के इंजन में खराबी आ रही है। ट्रेक पर मवेशियों की संख्या बढऩे पर रेलवे के संरक्षा, इंजीनियरिंग और आरपीएफ को अभियान शुरू करना पड़ा है। इसके साथ ही ग्राम पंचायतों, विद्यालयों और नगरीय निकायों से भी मवेशियों को ट्रेक पर आने से रोकने का अनुरोध किया जा रहा है।
आधा दर्जन जिंदगियां बन रहीं काल का ग्रास
पशुपालकों से समझाइश के साथ सख्ती भी की जा रही है। ट्रेक पर पशु चराने वाले पशुपालकों के खिलाफ रेलवे एक्ट के तहत कार्रवाई की जा रही है। ताकि इन मामलों पर लगाम लग सके। दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग पर कोटा में मंडल में हर रोज औसत 6 से 7 कैटल रनओवर हो रहे हैं।
इन जगहों पर समस्या ज्यादा
दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग पर दरा, डाढ़देवी, भवानमंडी, सवाई माधोपुर, इंद्रगढ़, लाखेरी, बयाना, गंगापुर सिटी सहित कई इलाकों में ट्रेक पर मवेशी ज्यादा आ रहे हैं। इसलिए यहां नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से पशु पालकों को जागरूक किया जा रहा है। इसमें बताया जा रहा है कि ट्रेक पर मवेशियों के आने पर ट्रेन से कटने की आशंका रहती है।
35 प्रतिशत ट्रेनें विलम्ब हुईं
सूत्रों के अनुसार जून 2018 में 35 प्रतिशत मेल, एक्सप्रेस ट्रेनें विलम्ब हुई। वहीं मई 2018 में 40 प्रतिशत और अप्रेल 2018 में 39 प्रतिशत मेल, एक्सप्रेस ट्रेनें विलम्ब हुई। ऐसे में बारिश में कैटल रनओवर की संख्या में बढऩे से यह आंकड़ा बढ़ रहा है। रेलवे के अनुसार पिछले तीन माह में ट्रेक के रखरखाव के कारण भी ट्रेनें विलम्ब हुई।
ये ट्रेनें विलम्ब हुई
कोटा जंक्शन से गुजरने वाली कई ट्रेन बुधवार को भी देरी से पहुंची। रेलवे के अनुसार बान्द्रा जाने वाली अवध एक्सप्रेस 6 घंटे 33, गोवा संपर्क क्रांति 3 घंटे, गरबा एक्सप्रेस 4 घंटे, पटना-कोटा एक्सप्रेस ढाई घंटे, गाजीपुर-बान्द्रा एक्सप्रेस 4 घंटे, केरला संपर्क क्रांति 3 घंटे विलम्ब हुई।
Published on:
19 Jul 2018 01:18 am
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