14 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

चिकित्सक हड़ताल : बात नहीं बनी तो आज से बिगड़ेंगे अस्पतालों के हालात, रेजीडेंट भी होंगे शामिल

सेवारत चिकित्सक अपनी 33 सूत्री मांगों पर अड़े हुए हैं। उनकी हड़ताल मंगलवार को भी जारी रही। ऐसे में डिस्पेंसरी, सीएचसी, पीएचसी पर मरीज परेशान हुए।

2 min read
Google source verification

कोटा

image

Zuber Khan

Nov 08, 2017

Doctors Strike in Rajasthan

कोटा . सेवारत चिकित्सक अपनी 33 सूत्री मांगों पर अड़े हुए हैं। उनकी हड़ताल मंगलवार को भी जारी रही। ऐसे में डिस्पेंसरी, सीएचसी, पीएचसी पर पहुंचने वाले मरीज परेशान हुए। किसी ने आयुष चिकित्सकों से जांच कराई तो किसी ने एलोपैथी डाक्टर्स से लिया उपचार। लेकिन वरिष्ठजन जो नियमित एक ही डॉक्टर से इलाज लेते हैं। वे डॉक्टर नहीं मिलने से वापस लौट गए या पुरानी दवा लिखवाकर ले गए। चिकित्सकों की हड़ताल से अस्पतालों की व्यवस्थाएं अस्त-व्यस्त हो चुकी है।

Read More: बिगड़ी व्यवस्थाओं से मरीज हुए परेशान तो आयुष चिकित्सकों ने संभाली कमान


रेजीडेंट ने काली पट्टी बांधकर किया कार्य

इधर, दूसरी तरफ सेवारत चिकित्सकों की हड़ताल का समर्थन करते हुए रेजीडेंट डॉक्टरों ने भी काली पट्टी बांधकर कार्य किया। शाम को न्यू मेडिकल कॉलेज से घटोत्कच्छ चौराहे तक रेजीडेंट डॉक्टरों ने कैण्डल मार्च निकालकर विरोध दर्ज कराया। रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजमल मीणा ने कहा कि सरकार ने मांगें नहीं मानी तो बुधवार से सभी रेजीडेंट डॉक्टर भी हड़ताल में शामिल हो जाएंगे। सेवारत चिकित्सक संघ के अध्यक्ष डॉ. दुर्गाशंकर सैनी ने बताया कि सरकार जब तक ३३ सूत्रीय मांगों पर लिखित में समझौता नहीं करेगी, हड़ताल जारी रहेगी।

Read More: रिश्वत लेकर भागे हैड कांस्टेबल ने लगाई साढ़े तीन माह तक दौड़ जब थका तो कर दिया सरेण्डर



भूमिगत रहे अधिकांश पदाधिकारी

हड़ताल का भय डॉक्टर्स में भी दिखाई दिया। इस आंदोलन में जो मुख्य भूमिका निभा रहे हैं या अपने-अपने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उनमें से अधिकांश पदाधिकारी भूमिगत हो गए। वहीं कईयों ने फोन बंद कर लिए। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आरके लवानिया पिछले दो दिन से फोन नहीं उठा रहे।
यहां है चिकित्सकों की हड़ताल का असर

Read More: लकड़ी खरीदने के लिए भी नहीं थे पैसे तो ऐसे जलाया पत्नी का शव, प्रेम विवाह की मिली इतनी बड़ी सजा

सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र भीमगंजमंडी व दादाबाड़ी में सेवारत चिकित्सकों की हड़ताल का सबसे अधिक असर दिखाई दिया। इसके अलावा रामपुरा जिला अस्पताल, डीसीएम, काला तालाब, टिपटा, सूरजपोल, कुन्हाड़ी, ईएसआई अस्पताल, कैथून, रामगंजमंडी, सुल्तानपुर व सांगोद में सेवारत चिकित्सकों के हड़ताल पर चले जाने से चिकित्सा सेवाएं प्रभावित हैं।