
कोटा . सेवारत चिकित्सक अपनी 33 सूत्री मांगों पर अड़े हुए हैं। उनकी हड़ताल मंगलवार को भी जारी रही। ऐसे में डिस्पेंसरी, सीएचसी, पीएचसी पर पहुंचने वाले मरीज परेशान हुए। किसी ने आयुष चिकित्सकों से जांच कराई तो किसी ने एलोपैथी डाक्टर्स से लिया उपचार। लेकिन वरिष्ठजन जो नियमित एक ही डॉक्टर से इलाज लेते हैं। वे डॉक्टर नहीं मिलने से वापस लौट गए या पुरानी दवा लिखवाकर ले गए। चिकित्सकों की हड़ताल से अस्पतालों की व्यवस्थाएं अस्त-व्यस्त हो चुकी है।
रेजीडेंट ने काली पट्टी बांधकर किया कार्य
इधर, दूसरी तरफ सेवारत चिकित्सकों की हड़ताल का समर्थन करते हुए रेजीडेंट डॉक्टरों ने भी काली पट्टी बांधकर कार्य किया। शाम को न्यू मेडिकल कॉलेज से घटोत्कच्छ चौराहे तक रेजीडेंट डॉक्टरों ने कैण्डल मार्च निकालकर विरोध दर्ज कराया। रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजमल मीणा ने कहा कि सरकार ने मांगें नहीं मानी तो बुधवार से सभी रेजीडेंट डॉक्टर भी हड़ताल में शामिल हो जाएंगे। सेवारत चिकित्सक संघ के अध्यक्ष डॉ. दुर्गाशंकर सैनी ने बताया कि सरकार जब तक ३३ सूत्रीय मांगों पर लिखित में समझौता नहीं करेगी, हड़ताल जारी रहेगी।
भूमिगत रहे अधिकांश पदाधिकारी
हड़ताल का भय डॉक्टर्स में भी दिखाई दिया। इस आंदोलन में जो मुख्य भूमिका निभा रहे हैं या अपने-अपने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उनमें से अधिकांश पदाधिकारी भूमिगत हो गए। वहीं कईयों ने फोन बंद कर लिए। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आरके लवानिया पिछले दो दिन से फोन नहीं उठा रहे।
यहां है चिकित्सकों की हड़ताल का असर
सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र भीमगंजमंडी व दादाबाड़ी में सेवारत चिकित्सकों की हड़ताल का सबसे अधिक असर दिखाई दिया। इसके अलावा रामपुरा जिला अस्पताल, डीसीएम, काला तालाब, टिपटा, सूरजपोल, कुन्हाड़ी, ईएसआई अस्पताल, कैथून, रामगंजमंडी, सुल्तानपुर व सांगोद में सेवारत चिकित्सकों के हड़ताल पर चले जाने से चिकित्सा सेवाएं प्रभावित हैं।
Published on:
08 Nov 2017 01:44 am
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