20 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

13 साल बाद भी रिडकोर ने नहीं कराया निर्माण

- बायपास पर यात्री प्रतीक्षालय की दरकार

2 min read
Google source verification

कोटा

image

Anil Sharma

Nov 21, 2020

moikalan, kota

मोईकलां. बपावर बायपास पर यहां बनना था प्रतीक्षालय।

मोईकलां. लगभग १३ वर्ष पूर्व सवा दो सौ करोड़ रुपए की लागत से बनाए गए बारां-झालावाड़ मेगा हाइवे निर्माण के दौरान रिडकोर के अधिकारियों को जिस जगह बायपास बनाया। वहां पर यात्रियों की सुविधा के लिए प्रतीक्षालय का निर्माण कराना था। लेकिन अभी तक भी प्रतिक्षालय नहीं बनाए गए हैं।वर्ष २००७ में बारां से झालावाड़ के बीच करीब सवा दो सौ करोड़ रुपए की लागत से मेगा हाइवे का निर्माण कराया गया था।
रोड निर्माण के समय रिडकोर के अधिकारियों ने कलमण्डा, बामला, बपावर, गोलाना, बाघेर व मंडावर बायपास पर यात्रियों की सुविधा के लिए यात्री प्रतिक्षालय का निर्माण कराना था। वर्ष २०१४ में यात्री प्रतीक्षालय के निर्माण की मांग विधानसभा भी पहुंची थी। इसके बाद अधिकारियों ने सर्वे कर बपावर व सूमर में निर्माण की बात कही। पंचायत जनप्रतिनिधियों से भी बात की गई। इतना कुछ होने के बाद भी दोनों जगह में से कही पर भी यात्री प्रतिक्षालय नहीं बनाया गया। बारां से झालावाड़़ के बीच सिर्फ बामला व खानपुर बायपास पर ही निर्माण के बाद प्रतीक्षालय का निर्माण कराया गया। जबकि बायपास निकालते समय रिडकोर की ओर से यह कहा गया था कि गांव-कस्बे के रोड पर आने वाले लोगों को बैठने में कोई परेशानी नहीं हो इसके लिए जहां-जहां बायपास है वहां प्रतीक्षालय बनाए जाएंगे।

तैयार करेंगे रूपरेखा
भाजपा के बपावर मण्डल महामंत्री नवीन नागर ने बताया कि आमजन की इस समस्या को लेकर एक बार फिर से रिडकोर के प्रोजेक्ट निदेशक को पत्र लिखा है। साथ ही रिडकोर के जयपुर स्थित उच्चाधिकारियों से बातकर यात्री प्रतीक्षालय निर्माण को लेकर अवगत कराया जाएगा। इस बारे में रिडकोर के प्रोजेक्ट निदेशक पीआर सिंह ने बताया कि बात यही है कि रोड निर्माण के समय बायपासों पर प्रतीक्षालय बनने थे। समय पर क्यों नहीं बन पाए इसे लेकर जयपुर क्षेत्रीय निदेशक से बात कर आगामी रूपरेखा तैयार की जाएगी।

तैयारशुदा लगना था
मेगा हाइवे निर्माण के समय बताया गया था कि हर बायपास पर तैयारशुदा यात्री प्रतीक्षालय स्थापित किया जाएगा। ऐसा लगना था कि समय आने पर उसे एक जगह से उठाकर दूसरे स्थान पर भी लगाया जा सके। इस मामले को लेकर अटरू प्रधान अजय सिंह हाड़ा ने भी रिडकोर को पत्र लिखा था।