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आखिर क्यों बना लहसुन, अधिकारियों के गले की फांस, जानने के लिए पढ़े खबर …

केन्द्रों पर रखे लहसुन से उठने लगी दुर्गंध ,बारिश और फिर गर्मी होने से आ रही सड़ांध
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कोटा

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Zuber Khan

Jun 21, 2018

लहसुन मंडी

लहसुन मंडी

कोटा. बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत हाड़ौती में 3257 रुपए प्रति क्विंटल के भाव में किसानों से खरीदा लहसुन अब अधिकारियों के लिए गलफांस बनता जा रहा है। खरीदे गए लहसुन का दिल्ली की आजादपुर मंडी में उचित भाव नहीं लग रहा। वहां एक सप्ताह पहले भेजे लहसुन भरे 25 ट्रक खड़े हुए हैं, वहीं करीब एक लाख क्विंटल लहसुन हाड़ौती की विभिन्न मंडियों के खरीद केंद्रों पर पड़ा है। बारिश आने और वापस गर्मी पडऩे से यह लहसुन अब सड़ांध मारने लगा है। इसके चलते मंडी व्यापारी बार-बार खरीद केंद्र प्रभारियों से लहसुन का उठाव कराने की मांग कर रहे हैं, वहीं खरीद केंद्र प्रभारी भी लहसुन के उठाव के लिए राजफैड के उच्चाधिकारियों को सूचित कर रहे हैं, लेकिन उच्चाधिकारी पीछे हट रहे हैं।
पिछले दिनों सुल्तानपुर में एक किसान की ओर से कलक्टर की कार के सामने लेटने के बाद जिला कलक्टर ने राजफैड अधिकारियों को गौण मंडी में रखे लहसुन के कट्टों का उठाव कराने के निर्देश दिए थे। निर्देश की पालना में राजफैड ने कट्टों का उठाव तो कराकर दिल्ली भेज दिया, लेकिन वहां लहसुन 4-5 रुपए किलो बोला जा रहा है। इस भाव में अधिकारी बेचने को तैयार हो नहीं रहे। एेसे में अब यह लहसुन अधिकारियों के गले पड़ गया है।

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हाड़ौती में खरीदा 4.96 लाख क्विंटल
राजफैड ने हाड़ौती के 15 खरीद केंद्रों पर मंगलवार तक 4 लाख 96 हजार 896 क्विंटल लहसुन खरीदा। योजना से हाड़ौती के 13 हजार 702 किसानों को लाभांवित किया है, नौ जून से पहले तक लहसुन बेचने वाले किसानों का भुगतान किया जा चुका है।

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30 जून तक होगी लहसुन खरीद
बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत लहसुन खरीद की तिथि को लेकर किसानों में बने संशय को लेकर कृषि विभाग के अधिकारियों ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि लहसुन खरीद 30 जून तक होगी। गौरतलब है कि सीएम मुख्यालय से जारी विज्ञप्ति में 30 जून तक खरीद के निर्देश दिए गए थे। इधर, सांसद ओम बिरला ने लहसुन खरीद सुचारू रखने पर मुख्यमंत्री का आभार जताया है। बिरला ने मुख्यमंत्री के पीपल्दा विधानसभा क्षेत्र के दौरे के दौरान लहसुन खरीद का जिक्र किया।
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45 करोड़ की सड़क एक साल में दूसरी बार टूटी, गुणवत्ता पर सवाल यपाटन मार्ग पर करीब 45 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 22.50 किलोमीटर लंबी सड़क एक वर्ष के भीतर दूसरी बरसात भी नहीं झेल पाई। सड़क एक साल में दूसरी बार क्षतिग्रस्त हो गई है, जिससे निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस बार सुवासा, बाजड और जमीतपुरा गांव के बीच करीब 15 स्थानों पर डामर जगह-जगह से उखड़ गया है और गिट्टी बाहर निकलने लगी है। क्षतिग्रस्त सड़क पर पैचवर्क की मांग को लेकर ग्रामीणों ने शनिवार को सुवासा कस्बे में विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर बने गहरे गड्ढों के कारण विशेष रूप से रात्रि के समय वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अंधेरे में गड्ढे दिखाई नहीं देने से आए दिन दोपहिया और चारपहिया वाहन चालक गिरकर चोटिल हो रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन और सार्वजनिक निर्माण विभाग से तत्काल पैचवर्क और सड़क की स्थायी मरम्मत कराने की मांग की है। जानकारी के अनुसार, तालेड़ा से केशोरायपाटन तक सड़क निर्माण के लिए 45 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। निर्माण कार्य 15 अगस्त 2022 से शुरू हुआ था और इसे सितंबर 2023 तक पूरा किया जाना था, लेकिन सड़क के दोनों ओर लगभग डेढ़ मीटर पटरी निर्माण का कार्य अभी भी कई स्थानों पर अधूरा पड़ा है। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क पर लगभग एक वर्ष पूर्व डामरीकरण किया गया था, लेकिन दिसंबर 2025 में सुवासा, बाजड और जमीतपुरा के बीच करीब 20 स्थानों पर सड़क उखड़ गई थी। उस समय संवेदक द्वारा पैचवर्क कर सड़क की मरम्मत की गई थी, लेकिन मरम्मत कार्य की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं रही। परिणामस्वरूप जुलाई 2026 में दूसरी बरसात शुरू होते ही सड़क फिर से उखड़ गई और कई स्थानों पर गिट्टी निकलने लगी है। लगातार टूट-फूट के कारण सड़क धीरे-धीरे बड़े गड्ढों में तब्दील होती जा रही है। इस मार्ग से प्रतिदिन करीब तीन हजार से अधिक छोटे-बड़े व भारी वाहन गुजरते हैं। यह सड़क नेशनल हाईवे 52 व मेगा हाईवे को जोड़ती है। सड़क की बदहाल स्थिति के कारण वाहन चालकों, किसानों, मजदूरों और आसपास के गांवह/वें के लोगों को रोजाना परेशानी झेलनी पड़ रही है। कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। अभिषेक गुर्जर, सहायक अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग, तालेड़ा ने बताया कि तालेड़ा से सुवासा के बीच कुछ स्थानों पर सड़क क्षतिग्रस्त हुई है और सड़क निर्माण का कुछ कार्य अभी शेष है। संवेदक का पूरा भुगतान अभी नहीं हुआ है। क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत करने के निर्देश संवेदक को दे दिए गए हैं। सड़क वर्तमान में गारंटी अवधि में है और इसकी मरम्मत संवेदक द्वारा ही कराई जाएगी।

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