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Traditional shopping on Diwali: चमक-दमक से आक​र्षित कर लेता है कोटा का यह डेढ़ सौ साल पुराना बाजार

Traditional shopping on Diwali: कोटा. चंबल के किनारे बसा कोटा अब दूर तक फैल गया। ऊंची-इमारतें खडी हो गई, लेकिन अब भी शहर के कई इलाके, बाजार पुरानी चमक बिखेर रहे हैं। पुराने कोटा के रामपुरा क्षेत्र बर्तन बाजार सें आज भी परम्परागत बर्तनों की चमक फैल रही है। करीब डेढ़ सौ वर्ष पुराने इस बाजार में थाली, कटोरी, चकला, बेलन, भगोनी, चरा, चरी, तांबा, पीतल, कांस्य, लोह, अलोह सभी तरह के बर्तन मिलेंगे।

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Hemant Sharma

Oct 16, 2022

Traditional shopping on Diwali: कोटा. चंबल के किनारे बसा कोटा अब दूर तक फैल गया। ऊंची-इमारतें खडी हो गई, लेकिन अब भी शहर के कई इलाके, बाजार पुरानी चमक बिखेर रहे हैं। पुराने कोटा के रामपुरा क्षेत्र बर्तन बाजार सें आज भी परम्परागत बर्तनों की चमक फैल रही है। करीब डेढ़ सौ वर्ष पुराने इस बाजार में थाली, कटोरी, चकला, बेलन, भगोनी, चरा, चरी, तांबा, पीतल, कांस्य, लोह, अलोह सभी तरह के बर्तन मिलेंगे।
दीपावली व धनतेरस और देव उठनी के सावों में तो यहां पैर रखने की जगह भी नहीं मिलेगी। बाजार में भी मुश्किल से तीन फीट ठठेरा गली तो बारह माह ठसाठस रहती है। बदलाव के साथ नए तरह के बर्तन भी यहां हैं। अब बाजार के एक भाग को शास्त्री मार्केट नाम दे दिया गया है।

रियासत काल में ही बस गया था बाजार

रामपुरा क्षेत्र में िस्थत बर्तन बाजार, ठठेरा के बर्तनों की चमक दूर तक जाती है। विक्रेताओं के अऩसार हाड़ौती समेत विभिन्न क्षेत्रों से लोग बर्तन खरीदने आते हैं। धन तेरस से दीपावली व इसके बाद देव उठनी एकादशी से शुरू होने वाले सावों में विशेष खरीदारी होती है। बर्तनों के विक्रेता मरम्मत करने वाले रघुनंदन के अनुसार उसकी दुकान करीब डेढ़ सौ वर्ष पुरानी है। शास्त्री मार्केट में नंदकिशोर की दुकान 85 वर्ष पुरानी है। इतिहास विद फिरोजअहमद के अनुसार कोटा का बर्तन बाजार करीब डेढ़ सौ वर्ष पुराना है।

150 वर्ष पुरानी दुकान भी

ठठेरा गली में पीतल के बर्तनों के विक्रेता व कलई कर चमकाने वाले रघुनंदन ठठेरा बताते हैं कि पीतल के बर्तनों का क्रेस फिर से बढ़ रहा है। उनकी दुकान पर अन्य जगह से राज परिवार के सदस्य भी गत दिनों बर्तन खरीदने आए हैं।उनकी दुकान करीब 150 वर्ष पुरानी है। बर्तनों को टांचने का काम करने वाले कारीगर अब नहीं रहे। पहले ठठेरा गली भरी हुई थी, और दिन भर बर्तनों को टांचकर सुंदर बनाने का काम चलता था।ऐसे कारीगरों की अब एक दो दुकानें रह गई है। बच्चे इस व्यवसाय में नहीं पड़ना चाहते।

उत्साह आ रहा नजर

दीपावली के पांच दिवसीय महापर्व में अब सप्ताह भी शेष नहीं है। बाजारों में उत्साह का माहौल है। लोग खरीदारी को लेकर उत्साहित हैं। महापर्व पर घर में जरूरत की वस्तुओं की खरीदारी की जाएगी तो दीपावली पर घर गृहस्थी के लिए शगुन के तौर पर बर्तन भी खरीदे जाएंगे। कोरोना के दो साल बाद अब बर्तन बाजार में खासा उत्साह है। बर्तनों के विक्रेताओं के अनुसार दीपावली पर अमूनन तौर पर 10 करोड का कारोबार होने की उम्मीद है। विक्रेताओं के अनुसार अब बर्तनों में भी नवाचार हो रहे हैं। लोग इन्हें पसंद कर रहे हैं।

खास होती है खरीदारी

धन त्रयोदशी पर धातुओं की खरीद का विशेष महत्व माना गया है। इसी के चलते तांबा, पीतल, कास्य, स्टील के बर्तन विक्रेताओं मे खासा उत्साह है। कोटा अलोह धातु व्यापार समिति बर्तन बाजार के अध्यक्ष विमल गुप्ता के अनुसार कोटा में 150 से 200 बर्तनों की छोटी बड़ी दुकानें हैं।

पीतल बदला, लोहा वही

रामपुरा बर्तन बाजार में विक्रेता विमल गुप्ता, सुमित गोयल व घनश्याम आडवानी के अनुसार दीपावली पर शगुन के तौर पर कोई न कोई बर्तन जरूर खरीदाता है। लोग पीतल, कास्य, स्टील व तांबे सभी धातुओं के बर्तन खरीदते हैं।इसी के चलते विक्रेता दीपावली की तैयारी कर रहे हैं। अब बर्तनों में भी कई वैराइटीज आ रही है। पीतल के कूकर, उपहार सेट, डिनर सेट, ऑन, टी सेट पीतल में मिल रहे हैं। थालियां, गिलास व अन्य बर्तनों मे बदलाव आए हैं। लेजर प्रिंट व पॉलिश वाले बर्तनों की खासी डिमांड है।

शोएब अली बताते हैं कि लोहे के बर्तन आज भी परम्परागत रूप से तैयार हो रहे हैं। कढ़ाई, तव्वा, झारी, तई समेत कुछ बर्तन होते हैं। पहले भी यही मिलते थे। शोएब मानते है कि दीपावली के सीजन में शहर में करीब 2 करोड का कारोबार हो जाता है। रक्तअल्पता को दूर करने के लिए चिकित्सक लोहे के पात्रों का उपयोग बताते हैं।