
कोटा .
किसी मकान का मेनगेट टूटा है तो किसी के गेट में सांकल नहीं। किसी में दिनभर पानी बह रहा तो किसी मकान के आगे नाली जाम। हालत ये कि इन मकानों में जानवर आसानी से घुसकर कब निकल जाते हैं, पता ही नहीं चलता। ये हाल किसी कच्ची बस्ती के नहीं, सबसे सुरक्षित समझे जाने वाले कोटा के केन्द्रीय कारागार (जेल) की कार्मिक आवासों की बात कर रहे हैं।
जेल परिसर में कर्मचारियों के लिए 41 आवास बने हुए हैं। अधिकतर आवास जर्जर हैं। इनमें जेल कर्मचारी और उनके परिवार नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। जिन आवासों को देखने भर से ही डर लगने लगता है, उनमें ये लोग रह रहे हैं। परिवारों की जान जोखिम में रहती है।
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रस्सी से बांध रखा दरवाजा
जेल कर्मचारियों का एक आवास तो ऐसा है जिसका लकड़ी का मेनगेट ही टूटा हुआ है। अंदर कमरे के दरवाजे में सांकल तक सही ढंग से नहीं लगती। कर्मचारी परिवार को घर से बाहर जाने पर और रात के वक्त दरवाजा रस्सी से दीवार से बांधकर रखना पड़ता है। आंगन की दीवार भी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त है।
दुर्गंध के बीच रहना मजबूरी
जेल परिसर में कई मकान तो ऐसे हैं जिनके सामने से गुजर रही नाली जाम है। हालत ऐसी कि महीनों से साफ नहीं किया हो। दुर्गंध निकल रही है। सूअरों का जमावड़ा है। इनमें आवासों में रहने वालों को न केवल दुर्गंध, वरन् मच्छरों के कारण बीमारी का भी सामना करना पड़ रहा है।
बाथरूम ही नहीं
जेल कर्मचारियों के मैस के पास एक बैरक बनी हुई है। इसमें बोर्डर होमगार्ड से लेकर कई कर्मचारी भी रह रहे हैं। लेकिन वहां उनके नहाने के लिए बाथरूम तक नहीं। उन्हें खुले में एक छोटी सी जगह पर नहाना पड़ता है, इसके लिए भी नम्बर लगता है।
बंदियों को हर सुविधा
जेल कर्मचारियों का कहना है कि जेल में बंदियों की हर सुविधा का ध्यान रखा जा रहा है। उनके लिए रहने से लेकर बाथरूम तक सभी अच्छे हैं, लेकिन कर्मचारियों पर किसी का ध्यान नहीं है।
बजट आने पर होगा काम
जेल अधीक्षक सुधीर प्रकाश पूनिया ने बताया कि जेल कर्मचारियों के अधिकतर आवास तो सही हैं जिनका करीब दस साल पहले ही निर्माण हुआ है। कुछ जर्जर हो रहे हैं। इनकी मरम्मत के लिए गत वर्ष बजट आया था, लेकिन बजरी पर रोक व जीएसटी लगने से काम नहीं हो सका। अब दोबारा से बजट आने पर काम कराया जाएगा।
Published on:
05 Apr 2018 02:31 pm
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