कोटा. हैरिटेज चंबल रिवर फ्रंट पर बनाई जा रही दुनिया की सबसे बड़ी घंटी की ढलाई के बाद इसका सांचा खोलने को लेकर चंबल रिवर फ्रंट के चीफ आर्किटेक्ट अनूप भरतरिया और वर्ल्ड बिगेस्ट बेल के प्रोजेक्ट डिजाइनर देवेन्द्र आर्य के बीच चल रहा विवाद मंगलवार को और गहरा गया। इसके चलते बेल डिजाइनर आर्य ने कोटा छोड़ जोधपुर रवाना हो गए।
बेल डिजाइनर देवेन्द्र आर्य ने बताया कि चंबल रिवर फ्रंट के उद्घाटन को लेकर चीफ आर्किटेक्ट दुनिया की सबसे बड़ी घंटी को सांचे से बाहर लाने में जल्दबाजी कर रहे हैं। इस बारे में प्रशासन व राज्य सरकार को अवगत करवा दिया गया है। घंटी के सांचे को खोलने का काम गैर तजुर्बेकार से करवाया जा रहा है। इस घंटी पर 13 महीने दिन-रात मेहनत की थी। अब इसे टूटते हुए नहीं देख सकता। इसलिए मैंने कोटा छोड़ दिया है और में जोधपुर जा रहा हूं।
उन्होंने कहा कि घंटी को प्राकृतिक रूप से ठंडा न होने देना व इसे जबरन सांचे से बाहर निकालना इसे कमजोर करेगा और इसके टूटने या क्रेक्स आना तय है। समय से पहले बेल का सांचा हटाने से थर्मल शॉक से घंटी टूट सकती है। जल्दबाजी में इसे सांचे से बाहर निकालने से निश्चित रूप से इसकी गुणवत्ता खराब होगी।