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1985 की वो गर्मियां ..और देखते ही देखते राजस्थान के इस शहर की तकदीर बदल गई

जिसकी धमक बेंगलुरु से लेकर अमेरिका के सिलिकन वैली तक सुनाई देती है ।...

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कोटा

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Rajesh Tripathi

Jan 15, 2019

तो हम बात कर रहे हैं 1985 की गर्मियों की और राजस्थान के उस शहर की जिसकी धमक बेंगलुरु से लेकर अमेरिका के सिलिकन वैली तक सुनाई देती है ।

कोटा…कचौरी वाला , स्टोन वाला और उस से भी ज्यादा कोचिंग वाला। कहानी शुरू होती है 1981 से..जब जे के सिंथेटिक में काम करने वाले इंजीनियर वीके बंसल ने 8 वी कक्षा तक के बच्चों को पढ़ाना शुरू किया । पढ़ाने में मज़ा आया तो बात 11 वी और 12 वी तक पहुंची। और फिर आई 1985 की गर्मी । ये वो दौर था बोर्ड में नंबर लाना माउंट एवरेस्ट फतह करने जैसा होता था । लेकिन बंसल सर की ट्यूशन में पढ़ने वाला एक विद्यार्थी आईआईटी में सेलेक्ट हो गया। जब अख़बारों में खबरे छपी तो लोग हैरान हो गए कि ये आईआईटी किस बला का नाम है । अगले साल 3 फिर 8 और फिर सफलता का जो सिलसिला शुरू हुआ वो आज तक जारी है । 1991 में तो बंसल सर ने वीआर लेकर बंसल क्लासेज की स्थापना की । एक दौर ये भी आया जब आईआईटी में सेलेक्ट होने से मुश्किल बंसल क्लास में एडमिशन मिलना होता था।

बचपन के दोस्त, वो भी कॉलेज ड्रॉपआउट..घर
नहीं लौटे लेकिन कारनामा सुनेंगे तो हैरान रह जाएंगे….

कभी औद्योगिक नगरी के नाम से पहचाने जाने वाला कोटा आज दुनिया की सबसे बड़ी Coaching Factory है। यहां आकर पढ़ने वाले विद्यार्थी दुनिया भर में नाम कमा रहे है। वही करीबन 1000 करोड़ की ये इंडस्ट्री लाखों लोगों के रोजगार का जरिया भी बना हुआ है।