
कोटा। बाल विवाह समाज के लिए चुनौती है, जो बच्चों के सपने तोड़ देती है, लेकिन यहां इरादों की मजबूती की अलग ही मिसाल पेश की है चित्तौडगढ़ जिले के घोसुंदा निवासी एलन स्टूडेंट रामलाल भोई ने। डॉक्टर बनने की जिद ऐसी पकड़ी कि किसी भी परिस्थिति के आगे नहीं झुका और ना ही रुका। रामलाल ने नीट यूजी में 632 अंक हासिल किए। रामलाल भोई ने कोटा में पढ़कर नीट क्रेक की और परिवार का पहला डॉक्टर बनने जा रहा है।
11 वर्ष की अबोध उम्र में ही रामलाल का बाल विवाह हो गया। तब वह कक्षा 6 में ही था। बाल विवाह के बाद भी उसने पढ़ना नहीं छोड़ा। समाज की पिछड़ी सोच के चलते पढ़ाई करना भी आसान नहीं था। पिता नहीं चाहते थे कि 10वीं के बाद बेटा पढ़ाई करे, लेकिन बेटे की जिद थी कि आगे पढ़ाई करनी है। लोगों के बहकावे में आकर एक बार तो पिता ने रामलाल को पीटा और पढ़ाई नहीं करने की बात कही, लेकिन रामलाल के संकल्प का स्तर अलग ही था।
उसने पढ़ाई जारी रखी। दोस्त के पिता ने आकर समझाया तो रामलाल के पिता ने आगे की पढ़ाई में सहयोग किया। पढ़ाई के लिए परिवार माना, कर्जा लेकर पढ़ाया। जुनूनी बेटे ने खूब मेहनत की और आखिरकार पांचवें प्रयास में नीट क्रेक कर दिखाया। रामलाल राजनीति में जाकर जनसेवा करना चाहता है।
पत्नी ने मेरे लिए खुद की पढ़ाई त्यागी
रामलाल बताता है कि मेरी शादी आज की उम्र में होती तो विरोध भी करता लेकिन, तब मुझे क्या पता था, क्या हो रहा है ? उम्र 11 साल थी और कक्षा 6 में पढ़ता था। मेरी पत्नी भी हमारे ही उम्र की हैं। करीब छह साल पहले पत्नी ने ससुराल में आकर रहना शुरू कर दिया। वो खुद 10वीं तक पढ़ी हुई है। हमारे समाज में शिक्षा को इतना महत्व नहीं दिया जाता और ऐसे में कोई लड़की 10वीं तक पढ़ ले तो बहुत बड़ी बात मानी जाती है।
वो भी 10वीं के बाद पढ़ना चाहती थी, लेकिन मेरी पढ़ाई के लिए उसने खुद का त्याग किया और ससुराल की जिम्मेदारियां संभाली। मैं लगातार नीट की तैयारी में लगा रहा, लेकिन सलेक्शन हो नहीं रहा था। इस वजह से हमारे बीच काफी झगड़े होते थे, लेकिन मेरा जुनून देखकर उसने मेरा साथ दिया। नीट यूजी 2023 परीक्षा से छह माह पूर्व ही उसने बेटी को जन्म दिया है।
नीट के बारे में पता नहीं था
परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। गांव के ही सरकारी स्कूल से 10वीं कक्षा 74 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण की। इसके बाद 11वीं में मेरा दोस्त एग्रीकल्चर सब्जेक्ट ले रहा था तो मैं भी उसके साथ उदयपुर चला गया। एग्रीकल्चर विषय में एडमिशन लेने के लिए उदयपुर गया, लेकिन वहां जाने के बाद शिक्षकों ने बॉयोलॉजी विषय और नीट परीक्षा के बारे में जानकारी दी। मुझे तब तक नहीं पता था कि नीट जैसा कोई एग्जाम देने के बाद डॉक्टर बनते हैं, फिर मैंने बॉयोलॉजी विषय के साथ 11वीं और 12वीं कक्षा पास की। इस दौरान मैं समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित अम्बेडकर छात्रावास में रहता था, जो कि नि:शुल्क था।
पढ़ाई के लिए घर से भागा
नीट की तैयारी के लिए कोटा आने लगा तो लोगों ने कहा कि ‘क्या करेगा पढ़कर ?’ माता-पिता दोनों निरक्षर हैं। 10वीं कक्षा के बाद पिता पढ़ाना नहीं चाहते थे। इसके लिए उन्होंने मेरी पीटाई तक की, लेकिन मैं घर से भागकर उदयपुर गया और वहां एडमिशन लिया। बाद में दोस्त के पिता ने उन्हें समझाया तो वे माने। मैंने वर्ष 2019 में 12वीं कक्षा 81 प्रतिशत अंकांं से उत्तीर्ण की थी।
आर्थिक स्थिति काफी कमजोर
चित्तौड़गढ जिले के घोसुन्दा में भेड़च नदी किनारे हमारा कच्चा घर बना हुआ है। गांव के सरकारी नल से पानी भरकर लाते हैं। पिता गणेश भोई दूसरों के खेत जोतते हैं तो मां कमला देवी खेत से मिलने वाले चारे को रोजाना चित्तौड़गढ़ ले जाकर बेचती है। माता-पिता के अलावा हम पांच भाई-बहन हैं। दो बहनों की शादी हो चुकी है। एलन ने भी पूरा साथ दिया और मुझे फीस में 70 प्रतिशत की रियायत दी।
Published on:
19 Jan 2024 05:29 pm
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