कोटा. मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस और बीडीएस में दाखिले के लिए देशभर में एनटीए की ओर से नीट यूजी-2019 परीक्षा ( NEET UG 2019 exam ) नेशनल ( National Eligibility cum Entrance Test ) का आयोजन हुआ। परीक्षा के लिए 125 शहरों के 2500 से अधिक सेंटरों पर करीब 15 लाख 19 हजार स्टूडेंट्स पंजीकृत थे। राजस्थान में जयपुर, उदयपुर, अजमेर, जोधपुर समेत कोटा में परीक्षा हुई। इसमें एक लाख विद्यार्थी पंजीकृत हुए। कोटा शहर में 26 परीक्षा केन्द्रों पर 13 हजार स्टूडेंट्स पंजीकृत थे। नीट के इतिहास में पहली बार दोपहर में परीक्षा हुई। भीषण गर्मी में परीक्षा होने के कारण विद्यार्थियों के साथ अभिभावकों की भी परीक्षा रही। चिलचिलाती धूप में कतारों में लगकर विद्यार्थियों को केन्द्रों में प्रवेश करना पड़ा।
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एक्सपर्ट व विद्यार्थियों के अनुसार, नीट का पेपर ओवरऑल आसान रहा। इससे पिछले साल के मुकाबले कटऑफ ज्यादा जा सकती है। पेपर एनसीआरटी बेस्ड रहा। पिछले साल के कई सवाल रिपिट हुए। एग्जाम पैटर्न पिछले साल की तरह ही था, लेकिन बॉयलोजी में कई सवालों के जवाब असमंजस करने वाले थे। पेपर 720 अंकों का रहा। तीन घंटे के इस पेपर में बायो के 360, फिजिक्स के 108 व कैमिस्ट्री से 180 अंकों के सवाल पूछे गए।
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कड़ी जांच के बाद केन्द्र में प्रवेश
परीक्षा केंद्रों पर दोपहर 12 बजे से परीक्षार्थियों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था, जो डेढ़ बजे तक जारी रहा। परीक्षार्थियों को केन्द्र में प्रवेश से पहले मेटल डिटेक्टर व फ्रिस्किंग की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। इस बार कड़ा ड्रेस कोड भी जारी किया गया। आधी बाजू वाले हल्के कपड़े, कम हील वाली सैंडल या चप्पल अनिवार्य था। धार्मिक भावनाओं को सम्मान देते हुए परीक्षा में मुस्लिम महिला को बुर्का और सिख छात्र को पगड़ी पहनकर परीक्षा देने की छूट दी गई। परीक्षार्थियों से घड़ी, ब्रेसलेट, मैटेलिक आइटम, इलेक्ट्रानिक पेन, हैंडबैग, नाक की नथ को बाहर ही खुलवाया लिया। युवतियों की चुन्नी तक उतरवा ली गई। खुले बालों में युवतियों को केन्द्रों में प्रवेश दिया गया। कई युवतियों के मन्नत के धागे खुलवाए।
भीषण गर्मी में लम्बी कतारें
मई माह में भीषण गर्मी में दोपहर में परीक्षा होने के चलते बेटियां धूप में केंद्रों के बाहर अपनी बारी का इंतजार करती रही। भीषण गर्मी के चलते परेशान रही। बेटियों के साथ अभिभावकों की भी परीक्षा हुई। वे भी धूप में खड़े होकर बच्चों को प्रवेश दिलाने में मदद कर रहे थे। किसी ने मंदिर में तो पेड़ों की छांव में समय बिताया।