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NEET UG 2026: खुशखबर… एमबीबीएस सीटों में 15 हजार की बढ़ोतरी

नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) नई दिल्ली की ओर से जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार देश में एमबीबीएस सीटों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई
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कोटा

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Abhishek Gupta

Jan 31, 2026

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Kota News: नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) नई दिल्ली की ओर से जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार देश में एमबीबीएस सीटों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2025 की तुलना में 2026 में एमबीबीएस सीटों में लगभग 15 हजार की बढ़ोतरी हुई है, जबकि मेडिकल संस्थानों की संख्या 775 से बढ़कर 824 हो गई है।

एजुकेशन एक्सपर्ट देव शर्मा ने बताया कि वर्ष 2025 में देशभर के 775 मेडिकल संस्थानों में कुल 1,15,900 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध थी। जबकि वर्ष 2026 में 824 मेडिकल संस्थानों में सीटों की संख्या बढ़कर 1,29,603 हो गई है। यह वृद्धि नीट-यूजी 2026 में शामिल होने वाले लगभग 24 लाख विद्यार्थियों के लिए उत्साहवर्धक संकेत है।


सरकारी और निजी क्षेत्र में सीटों का विवरण

सरकारी मेडिकल संस्थानों की संख्या 450 है, जिनमें कुल 63,160 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध हैं। वहीं, निजी मेडिकल संस्थानों की संख्या 374 है, जहां 66,443 एमबीबीएस सीटें हैं। इस प्रकार कुल 824 मेडिकल संस्थानों में 1,29,603 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध हैं।

फरवरी के प्रथम सप्ताह से आवेदन की संभावना

नीट-यूजी 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन फरवरी के प्रथम सप्ताह से शुरू होने की संभावना है। पिछले वर्ष 2025 में नीट-यूजी के लिए आवेदन प्रक्रिया 7 फरवरी से प्रारंभ हुई थी।

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45 करोड़ की सड़क एक साल में दूसरी बार टूटी, गुणवत्ता पर सवाल यपाटन मार्ग पर करीब 45 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 22.50 किलोमीटर लंबी सड़क एक वर्ष के भीतर दूसरी बरसात भी नहीं झेल पाई। सड़क एक साल में दूसरी बार क्षतिग्रस्त हो गई है, जिससे निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस बार सुवासा, बाजड और जमीतपुरा गांव के बीच करीब 15 स्थानों पर डामर जगह-जगह से उखड़ गया है और गिट्टी बाहर निकलने लगी है। क्षतिग्रस्त सड़क पर पैचवर्क की मांग को लेकर ग्रामीणों ने शनिवार को सुवासा कस्बे में विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर बने गहरे गड्ढों के कारण विशेष रूप से रात्रि के समय वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अंधेरे में गड्ढे दिखाई नहीं देने से आए दिन दोपहिया और चारपहिया वाहन चालक गिरकर चोटिल हो रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन और सार्वजनिक निर्माण विभाग से तत्काल पैचवर्क और सड़क की स्थायी मरम्मत कराने की मांग की है। जानकारी के अनुसार, तालेड़ा से केशोरायपाटन तक सड़क निर्माण के लिए 45 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। निर्माण कार्य 15 अगस्त 2022 से शुरू हुआ था और इसे सितंबर 2023 तक पूरा किया जाना था, लेकिन सड़क के दोनों ओर लगभग डेढ़ मीटर पटरी निर्माण का कार्य अभी भी कई स्थानों पर अधूरा पड़ा है। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क पर लगभग एक वर्ष पूर्व डामरीकरण किया गया था, लेकिन दिसंबर 2025 में सुवासा, बाजड और जमीतपुरा के बीच करीब 20 स्थानों पर सड़क उखड़ गई थी। उस समय संवेदक द्वारा पैचवर्क कर सड़क की मरम्मत की गई थी, लेकिन मरम्मत कार्य की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं रही। परिणामस्वरूप जुलाई 2026 में दूसरी बरसात शुरू होते ही सड़क फिर से उखड़ गई और कई स्थानों पर गिट्टी निकलने लगी है। लगातार टूट-फूट के कारण सड़क धीरे-धीरे बड़े गड्ढों में तब्दील होती जा रही है। इस मार्ग से प्रतिदिन करीब तीन हजार से अधिक छोटे-बड़े व भारी वाहन गुजरते हैं। यह सड़क नेशनल हाईवे 52 व मेगा हाईवे को जोड़ती है। सड़क की बदहाल स्थिति के कारण वाहन चालकों, किसानों, मजदूरों और आसपास के गांवह/वें के लोगों को रोजाना परेशानी झेलनी पड़ रही है। कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। अभिषेक गुर्जर, सहायक अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग, तालेड़ा ने बताया कि तालेड़ा से सुवासा के बीच कुछ स्थानों पर सड़क क्षतिग्रस्त हुई है और सड़क निर्माण का कुछ कार्य अभी शेष है। संवेदक का पूरा भुगतान अभी नहीं हुआ है। क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत करने के निर्देश संवेदक को दे दिए गए हैं। सड़क वर्तमान में गारंटी अवधि में है और इसकी मरम्मत संवेदक द्वारा ही कराई जाएगी।

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