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Waterfall: नियाग्रा फॉल जैसे ही खूबसूरत है राजस्थान में यहां के झरने

Waterfall: पहले मानसून पूर्व की बारिश, फिर मानसून आया तो सावन से पहले सावन सी छटा छा गई। जैसे बाग बगीचों व खेतों में बहार आ गई। कृषक उत्साहित हो गए। खेतों में उत्साह के गीत गूंजने लगे। बरखा की बूंदों से प्रकृति ने हरयाला श्रृंगार कर लिया। तालाब व नदियों में लहरें उठने लगी तो इधर पर्यटन व दर्शनीय स्थलों का सौन्दर्य इस तरह से निखर आया जैसे मेहमानों की अगुवानी को बेताब हों।

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Waterfall: पहले मानसून पूर्व की बारिश, फिर मानसून आया तो सावन से पहले सावन सी छटा छा गई। जैसे बाग बगीचों व खेतों में बहार आ गई। कृषक उत्साहित हो गए। खेतों में उत्साह के गीत गूंजने लगे। बरखा की बूंदों से प्रकृति ने हरयाला श्रृंगार कर लिया। तालाब व नदियों में लहरें उठने लगी तो इधर पर्यटन व दर्शनीय स्थलों का सौन्दर्य इस तरह से निखर आया जैसे मेहमानों की अगुवानी को बेताब हों।

कोटा शहर से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर भंवरकुंज की छटा भी इन दिनों इसी तरह से आकर्षित कर रही है। शहर से करीब 20 किलोमीटर दूर रावतभाटा रोड स्थित गेपरनाथ शहरवासियों के साथ धर्म प्रेमियों के लिए भी खास है। यहां की छटा इन दिनों देखते ही बन रही है। यह स्थान पर्यटन प्रेमियों को रोमांच से भर देता है। चंबल की कराईयां, बहता झरना और शिव भक्क्तों की प्रिय स्थली इन दिनों खिल उठी है। बारिश के दिनों में दोनों पर्यटक स्थलों पर प्रशासन ने सुरक्षा बंदोबस्त भी कर रखे है। लेकिन यहां की छटा को देखकर यूं लगता है जैसे कोई मीठे सुर में गुनगुना रहा हो ..ये वादियां ये फिजाएं बुला रही है तुम्हें… खामोशियों की सदाएं बुला रही है तुम्हें…।