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बड़ी खबर: राजस्थान की उपजाऊ जमीन को बंजर कर रहा जूली प्लोरा, शहर से गांवों तक विलायती बबूल का दंश

Julie Plora, julie flora rajasthan, julie flora plant, julie flora tree : विलायती बबूल (जूली फ्लोरा) का दंश शहर से लेकर गांव-ढाणी तक के लोगों को झेलना पड़ रहा है।

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कोटा

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Zuber Khan

Dec 28, 2019

julie flora

बड़ी खबर: राजस्थान की उपजाऊ जमीन को बंजर कर रहा जूली प्लोरा, शहर से गांवों तक विलायती बबूल का दंश

कोटा. विलायती बबूल (जूली फ्लोरा) ( julie Floratree ) का दंश शहर से लेकर गांव-ढाणी तक के लोगों को झेलना पड़ रहा है। यह धरती को बंजर कर रहा है ( Barren Land ) और जमीनी पानी को पी रहा है। इस कारण भू-जल स्तर भी गिर रहा है। ( Groundwater level ) साथ ही, अपने आस-पास किसी भी तरह की वनस्पति को नहीं पनपने देता है। विलायती बबूल जमीन और मानव के लिए जहरीला नाग साबित हो रहा है। ( ulie flora tree Dangerous for Peoples ) कहावत है कि 'बोए बाग बबूल के तो आम कहां से होए... अर्थात आपके आस-पास बबूल के पेड़ लगे हुए हैं तो फल और छाया की इच्छा कैसे कर सकते हो। ( julie flora tree disadvantages ) आइए राजस्थान पत्रिका की मुहिम से जुड़कर विलायती बबूल की जगह छायादार व फलदार पौधे लगाकर खुशहाली लाएं। पत्रिका के जिलेभर के संवाददाताओं ने विलायती बबूल की स्थिति देखी है, कैसे यह जहरीला पेड़ अमरबेल की तरह फैल रहा है। रास्तों में ऐसा फैल गया है कि आवागमन ही मुश्किल हो गया है। खाली पड़ी जमीन पर साल दर साल बढ़ता जा रहा है। इस कारण उपजाऊ जमीन बंजर होती जा रही है। विलायती बबूल कैसे प्रकृति और आमजन को नुकसान पहुंचा रहा है, पेश एक रिपोट...।

सांगोद क्षेत्र में खंडगांव, कमोलर व खजूरी की राड़ी में हजारों वर्ग फीट एरिया में बबूलों का जंगल फैला है। दूर व उंचाई से देखने से यह किसी हरे भरे पेड़ों से आच्छादित जंगल दिखते हैं, लेकिन पास जाने के बाद इनकी हकीकत नजर आती है। सांगोद में भी खेराई बीड़ में वन विभाग व नगर पालिका की सैकड़ों बीघा भूमि पर एक दशक में बबूल का जंगल खड़ा हो गया।

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लील जाता है पेड़-पौधों को
मौत का कारण बन जाता है विलायती बबूल। हर साल सार्वजनिक एवं निजी संस्थाओं द्वारा हरियाली बढ़ाने के लिए फूलदार एवं फलदार पौधे रोपे जाते हैं, लेकिन इनमें से कुछ ही पेड़ बन पाते हैं। इन जगहों पर बड़ी तादाद में वन्य जीव भी रहते हैं जो बबूलों के कांटों में उलझकर चोटिल होते रहते हैं। बबूल का कांटा लगने पर मवेशी व वन्यजीव के शरीर पर घाव हो जाता है और यह घाव धीरे-धीरे उसकी मौत का कारण बन जाता है। ये बबूल धीरे-धीरे कृषि भूमि पर भी पैर पसारने लगे हैं, जिससे जमीन के पोषक तत्व कम होने लगे हैं। बबूल के पेड़ों से जहां भूजल स्तर में गिरावट आती जा रही है, वहीं पेड़ की लकड़ी का जलाने में भी कोई उपयोग नहीं होता। बावजूद इसके बढ़ते बबूल के जंगलों को खत्म करने की पहल नहीं हो रही।

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उपजाऊ जमीन को बना दिया उजाड़
रामगंजमंडी. क्षेत्र में अधिकांश सड़कों के किनारे विलायती बबूल उगे हुए हैं। चेचट से ऊंडवा के बीच सड़क के दोनों हिस्सों में अधिकांश जगह पर उगे ये बबूल सड़क सीमा तक आ चुके हैं। बंदा में टोल नाके के निकट ये सड़क की सरहद को छू रहे हैं। ऐसे में इनसे बचने के लिए चालकों को अपने वाहन बीच सड़क से निकालने पड़ते हैं। घुमाव वाले स्थान पर तो इनके कारण हादसे हो जाते हैं।

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