कोटा. केसरिया रंग तने लाग्यो ना गरबा..., पंखिड़ा रे उड़ने जाजे पावागढ़ रे..., ढोली थारो ढोल बाजे..., ढोलिडा ढोल रे वगाड़ा मारे हीच लेवे छे, राधे-राधे बरसानी वाली राधे...समेत सरीखे कई गीतों की धुनों पर जमकर गरबा खेला गया। आसमान माता रानी के जयकारों से गूंज उठा