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कोटा में हर प्रांत के स्वाद का जलवा, यूथ की पंसद से बदला फूड ट्रेंड

देश के हर प्रांत से आते हैं कोचिंग विद्यार्थी, इसलिए बदल रहा फूड ट्रेंडस, कोचिंग स्टूडेंटस की पसंद अनुसार होटल, रेस्त्रां, ढाबों में बदल गई फूड की वैरायटी, हर क्षेत्र के स्वाद का विशेष ख्याल

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निशांत शर्मा कोटा. कोटा में बसे व बाहर से आकर रहने वाले लोग बेहद लक्की है कि उन्हें देश के किसी भी कौने के स्वादिष्ट व्यंजन व फूड का स्वाद यहां मिल रहा है। यह बात अलग है कि यूथ की फूड च्वाइस की केटेगिरी में कोटा कचोरी के स्वाद का कोई सानी नहीं, लेकिन पिछले कुछ सालों में कोटा का फूड ट्रेंड्स काफी बदल चुका है। फूड ट्रेंड्स के बदलने में बड़ा कारण यहां की कोचिंग है।

कोटा में हर प्रांत के स्वाद का जलवा, यूथ की पंसद से बदला फूड ट्रेंड
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कोटा में हर प्रांत के स्वाद का जलवा, यूथ की पंसद से बदला फूड ट्रेंड

देशभर से हर साल लाखों विद्यार्थी पढऩे के लिए कोटा आते हैं। हर प्रांत के लोगों का स्वाद अलग-अलग हैं। विद्यार्थियों की पसंद व डिमांड के अनुसार साल-दर-साल कोटा के होटल, रेस्त्रां व ढाबों की फूड वैरायटी में भी काफी कुछ बदल सा गया है। अब यहां इतने अच्छे फूड्स ठिकाने बन चुके हैं कि हम किसी भी प्रांत का स्वादिष्ट व्यंजन बड़े चाव से खा सकते हैं या ऑनलाइन ऑर्डर घर पर मंगा सकते हैं। और मौका मिले तो इन ठिकानों पर जाकर स्वादिष्ट फूड को आजमा सकते हैं।

कोटा में हर प्रांत के स्वाद का जलवा, यूथ की पंसद से बदला फूड ट्रेंड

एक ही जगह पर इतनी फूड वैरायटी तो हमें किसी फूड फेस्टिवल या किसी अन्य शहर में भी नहीं मिलेगी, जितनी वैरायटी कोटा में हैं। आखिर कोटा में यूथ को पसंद आ रहे अलग-अलग प्रांतों के फूड या व्यंजन की क्या खासियत है, चलिए जानते हैं फूड ब्लॉगर इति गुप्ता, प्रज्योत मजूमदार और लवली गुरबानी की जुबानी।

लाजवाब लिट्टी चौखा

बिहार व झारखंड का प्रसिद्ध व्यंजन लिट्टी चौखा का स्वाद कोटा के इंद्रा विहार में मिल रहा है। न केवल बिहार-झारखंड के लोग बल्कि हाड़ौती के लोग भी इस व्यंजन का लुत्फ उठाते हैं।

मुम्बई का बड़ा पाव
कोटा शहर के कई क्षेत्रों में मुम्बई का बड़ा पाव मिल रहा है। स्वाद भी मुम्बई से कम नहीं है। शाम के समय बड़ा पाव खाने के लिए यूथ में खासा क्रेज रहता है।

इंदौरी पौहे व जलेबी

गरमा-गरम कचौरी, नींबू, हरी मिर्च, लच्छेदार प्याज के साथ इंदौरी पोहे और जलेबी जिसे देखते ही मुंह में पानी आ जाए। कोटा के कई मुख्य चौराहों पर यहीं से सुबह के नाश्ते की शुरुआत होती है। चाय के शौकीन हैं तो यहां 1-2 नहीं 20 तरह की चाय का लुत्फ उठा सकते हैं।

मक्का-बाजरे की रोटी व सरसों का साग
हाड़ौती में शेखावटी के जायके की दीवानगी है। कुछ दूर कोटा-बूंदी की सीमा पर इस जायके का लुत्फ उठाया जा सकता है। मारवाड़ का प्रसिद्ध खाना यानि दाल-बाटी चूरमा देसी घी के साथ अलग अंदाज में परोसा जाता है। मक्का, बाजरा की रोटी के साथ सरसों का साग और बाथली की कढ़ी लोग बड़े चाव से खाते हैं।

चौपाटी की रंगत निराली

यहां की रंगत भी गजब है और देर रात तक चलती है। चाइनीज और साउथ इंडियन फूड के साथ शहर के पुराने फूड डेस्टिनेशन के पाव भाजी, आलू चाट, मोमोज, फ्राइड राइस, फ्लेवर्ड पानी पूरी और पान बहुत फेमस हैं।

पुराने कोटा में चटपटा स्वाद
शहर के पुराने बाजार में न स्वाद की कमी और न स्वाद के कद्रदानों की। एक खोजेंगे तो 10 मिल जाएंगे। गरमा-गरम दूध में डूबी जलेबी हो, खट्टी चटनी के साथ पकौड़ी हो, मिठास भरा पान हो या शहर की चटपटी खबरें, इसी के लिए तो रामपुरा मशहूर है।

कोचिंग एरिया में स्ट्रीट फूड

लाजवाब स्ट्रीट फूड नए कोटा और नदी पार बसे लैंड मार्क की रंगत में चार चांद लगाता हैं। यहां 100 तरह के साउथ इंडियन डोसे नार्थ इंडियन तड़के के साथ आपको मिलेंगे। कई बड़े ब्रांड के फूड आउटलेट भी यहां मौजूद हैं।

बढ़ रहा है कैफे कल्चर
कोचिंग सिटी में पिछले 5 वर्षों में कैफे कल्चर बढ़ा है। युवाओं के साथ अब ऑफिस मीटिंग और फैमिली आउटिंग के लिए भी कैफे पसंदीदा डेस्टिेनेशन बन गए हैं। कॉफी के साथ कॉन्टिनेंटल, चाइनीज और इटालियन फास्ट फूड लोगों को यहां खींच लाता है।