3 फ़रवरी 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Teachers’ Day Special: डॉक्टरी-इंजीनियरिंग छोड़ शिक्षक बने आईआईटीयन, एमबीबीएस-एमडी डिग्रीधारी युवक

कोचिंग कैपिटल में कई आईआईटीयन्स ऐसे हैं जिनका सालाना पैकेज एक करोड़ के पार है। डॉक्टरी-इंजीनियरिंग कर चुके टीचर्स को यहां 30 लाख से 1.20 करोड़ तक का एनुअल पैकेज मिल रहा है। इनमें से कई शिक्षक तो वे हैं जो कोटा में कोचिंग लेकर ही डॉक्टर-इंजीनियर बने और फिर यहीं आकर बच्चों को नीट और जेईई की तैयारी करवा रहे हैं।

4 min read
Google source verification

कोटा

image

Akshita Deora

Sep 05, 2024

आशीष जोशी
यह कोचिंग कैपिटल कोटा है। यहां जैसे यंग-डायनेमिक, एनर्जेटिक टीचर शायद ही किसी दूसरे शहर में मिले। वो भी डॉक्टर-इंजीनियर टीचर। टीचिंग में कॅरियर बनाने का ऐसा जुनून कोटा में ही है। यह पढ़ाने का पैशन ही है कि आईआईटी और एम्स जैसे संस्थानों से पढ़कर इंजीनियर-डॉक्टर बने युवा शिक्षक का प्रोफेशन चुन रहे हैं। इन्हें न केवल बच्चों को पढ़ाने में संतोष मिलता है, बल्कि वे इसे खूब एंजॉय भी करते हैं। देश-विदेश में करोड़ों के पैकेज को ठुकराकर वे यहां कोटा में स्टूडेंट्स को डॉक्टर-इंजीनियर बनाने के लिए दिन-रात एक कर रहे हैं। अपने पढ़ाए बच्चों का मेडिकल-इंजीनियरिंग में सलेक्शन इन्हें बहुत बड़ी खुशी देता है। कोचिंग सिटी में ऐसे सैकड़ों टीचर हैं जिन्होंने आईआईटी जैसे बड़े इंजीनियरिंग संस्थानों से बीटेक और देश के बड़े मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस और फिर एमडी की डिग्री लेने के बाद टीचिंग में कॅरियर देखा।

कुछ टीचर्स का सालाना पैकेज करोड़ में
कोचिंग कैपिटल में कई आईआईटीयन्स ऐसे हैं जिनका सालाना पैकेज एक करोड़ के पार है। डॉक्टरी-इंजीनियरिंग कर चुके टीचर्स को यहां 30 लाख से 1.20 करोड़ तक का एनुअल पैकेज मिल रहा है। इनमें से कई शिक्षक तो वे हैं जो कोटा में कोचिंग लेकर ही डॉक्टर-इंजीनियर बने और फिर यहीं आकर बच्चों को नीट और जेईई की तैयारी करवा रहे हैं। यहां 400 से ज्यादा ऐसे टीचर्स हैं जो आईआईटी और एनआईटी से पासआउट हैं। वहीं 100 से ज्यादा डॉक्टर्स कोचिंग में पढ़ा रहे हैं।

बच्चों से मिलती है एनर्जी डोज


एमबीबीएस की पढ़ाई के बाद पीजी किया। फिर कुछ दिन अस्पताल में सेवाएं दी। एक दिन टीचिंग का मौका मिला और पढ़ाया तो जो सेटिसफेक्शन मिला वो मेरे लिए बेस्ट था। इसके बाद दुबारा कभी डॉक्टरी की प्रेक्टिस नहीं की। आज भी जब बच्चों के बीच जाता हूं तो एनर्जी डोज मिलती है।

  • डॉ.हिमांशु शर्मा, एमबीबीएस, एमडी

स्टूडेंट्स से मिला सम्मान सबसे बढ़कर


कोटा में कोचिंग की। इसके बाद एमबीबीएस और फिर एम्स से पीजी की। पढ़ाने का पैशन शुरू से ही था। इसलिए इसी फील्ड में कॅरियर बनाने कोटा आया और पढ़ाना शुरू किया। पढ़ाने के बाद जब स्टूडेंट्स से सम्मान मिलता है वो हर चीज से बढ़कर है। उनके बीच बहुत संतोष मिलता है।

  • राधाबल्लभ गुप्ता, एमडी, दिल्ली एम्स

टीचिंग से बेहतर कुछ नहीं


एमबीबीएस करने तक तो टीचिंग में कॅरियर बनाने का विचार नहीं था लेकिन जब कोटा में कुछ दिन टीचिंग की और यहां स्टूडेंट्स में टीचर्स के प्रति सम्मान और लगाव देखा तो सच में लगा कि इससे अच्छा प्रोफेशन नहीं हो सकता। क्लास लेने में जो आनंद आता है वो प्रेक्टिस में भी नहीं आता। टीचिंग को एन्जॉय करता हूं।

  • डॉ. अंकित छिप्पी, एमबीबीएस

शिक्षा ने मेरी लाइफ बदली, अब दूसरों की बदलने निकला हूं…


जब आप क्लास में होते हैं और बच्चों के चेहरों पर खुशी देखते हैं तो वो सबसे बेहतर समय होता है। बीटेक करने के दौरान ही टीचिंग में कॅरियर बनाने की सोच ली थी। मैं एक साधारण परिवार से हूं और शिक्षा से मेरे परिवार के जीवन में जो ट्रांसफोर्मेशन आया, वही बदलाव दूसरे घरों में भी करना चाहता हूं।
अमरनाथ आनन्द, बीटेक, आईआईटी दिल्ली

कोटा में बच्चों के हीरो हैं टीचर


आईआईटी मद्रास से कैमिकल में बीटेक किया। जॉब के कई ऑफर्स भी आए। बड़ा पैकेज, अच्छी प्रोफेशनल लाइफ, मल्टीनेशनल कम्पनीज सब कुछ थे। लेकिन उसमें सेल्फ सेटिसफेक्शन नहीं था। जब कोटा में क्लासरूम में बच्चों को पढ़ाया और उनकी नजरों में जो हीरोइज्म अपने लिए देखा तो उसके आगे दूसरे सभी कॅरियर फीके लगे।

  • पंकज बिरला, बीटेक आईआईटी मद्रास

सुकून देता है स्टूडेंट्स का थैंक्यू सर…


आईआईटी खडगपुर से इलेक्टि्रकल में बीटेक की। वहां ज्यादातर दोस्तों ने बड़ी कंपनियों में जॉब या स्टार्टअप जैसे रास्ते चुने। लेकिन मैं कोटा आया और यहां टीचिंग में कॅरियर बनाया। कोटा में टीचिंग की अलग ही वैल्यू है। जब क्लास खत्म होती है और बच्चे खुश होकर थैंक्यू सर… बोलते हैं तो मन को बहुत सुकून मिलता है।

  • वैभव झंवर, बीटेक आईआईटी खड़गपुर
  1. 400 से अधिक टीचर्स हैं कोटा में आईआईटीयन/ एनआईटीयन
  2. 100 से ज्यादा डॉक्टर्स कोचिंग में पढ़ा रहे
  3. 30 लाख से 1.20 करोड़ तक का सालाना पैकेज
Story Loader