इन दिनों मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ गया है। घर-घर सर्दी, जुकाम, खांसी व बुखार के मरीज सामने आ रहे है। मरीज आसपास इलाकों पर बनी शहरी प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर इलाज के लिए जा रहे है, लेकिन इन स्वास्थ्य केन्द्रों पर डॉक्टर्स नहीं है। कई केन्द्रों पर कार्य व्यवस्था चिकित्सक लगाकर काम चलाया जा रहा है। ऐसे में केन्द्रों पर आने वाले मरीज बिना इलाज के लौट रहे है। उन्हें 10 से 15 किमी दूरी तय कर एमबीएस या नए अस्पताल इलाज के लिए जाना पड़ रहा है।
इन दिनों मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ गया है। घर-घर सर्दी, जुकाम, खांसी व बुखार के मरीज सामने आ रहे है। मरीज आसपास इलाकों पर बनी शहरी प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर इलाज के लिए जा रहे है, लेकिन इन स्वास्थ्य केन्द्रों पर डॉक्टर्स नहीं है। कई केन्द्रों पर कार्य व्यवस्था चिकित्सक लगाकर काम चलाया जा रहा है। ऐसे में केन्द्रों पर आने वाले मरीज बिना इलाज के लौट रहे है। उन्हें 10 से 15 किमी दूरी तय कर एमबीएस या नए अस्पताल इलाज के लिए जाना पड़ रहा है। इससे इन बड़े अस्पतालों में डॉक्टर्स पर भार पड रहा है। वहीं, अव्यवस्था के चलते मरीजों को छोटे-मोटे इलाज के लिए धन व समय की बर्बादी हो रही है। जबकि राज्य सरकार एक तरफ हर मरीज को नि:शुल्क व बेहतर चिकित्सा का दावा करती है, लेकिन डॉक्टर्स के अभाव में यह हवा साबित हो रहा है।
विज्ञान नगर डिस्पेंसरी में फिजिशियन नहीं
नागरिक मोर्चा कोटा शहर के संयोजक पवन अग्रवाल व सचिव जितेन्द्र फतनानी ने बताया कि विज्ञान नगर में सीएचसी कई सालों से फिजिशिन ही नहीं है। ऐसे में मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल में चिकित्सक लगाने के लिए हाल ही में यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल को ज्ञापन देकर चिकित्सक लगाने की मांग की गई है। अग्रवाल ने बताया कि सीएचसी का भवन 4 करोड़ की लागत से पिछले तीन साल से बनकर तैयार खड़ा है, लेकिन फिजिशियन नहीं होने से सर्दी, जुकाम, खांसी व बुखार के मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा एक्सरे मशीन धूल फांक रही है। पर्याप्त चिकित्सक लगने से आसपास की एक लाख जनसंख्या को इसका फायदा मिलेगा।
- यहां भी डॉक्टर्स नहीं
सकतपुरा, टिपटा, छावनी पीएचसी में चिकित्सक के पद खाली है। जबकि ये डिस्पेंसरियां इन क्षेत्रों की सबसे बड़ी है। यहां चिकित्सक के अभाव में मरीजों को इलाज के लिए दूसरी जगह इलाज करवाने जाना पड़ रहा है। इसके अलावा अरण्डखेड़ा, मवासा, कैथून समेत अन्य जगहों पर भी चिकित्सक के पद रिक्त है।
इनका यह कहना
शहर समेत ग्रामीण क्षेत्रों में कई सीएचसी व पीएचसी पर चिकित्सकों के पद रिक्त है। कुछ चिकित्सकों का पीजी में नम्बर आने से वे चले गए। चिकित्सकों के पद भरने का कार्य राज्य सरकार के स्तर से होता है। पिछले दिनों हमने भी शहर में चिकित्सकों के पदों को लेकर आवेदन मांगे थे, लेकिन कोई नहीं आया।
डाॅ. जगदीश सोनी, सीएमएचओ, कोटा