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राजस्थान में यहां पुलिस की भूमिका में ग्रामीण, रात्रि में दे रहे पहरेदारी; जानिए क्यों

चोरी की वारदातों से निपटने के लिए ग्रामीण खुद जागरूक होकर पुलिस का दायित्व निभाते हुए रात्रि गश्त कर रहे है। मामला कोटा के सांगोद का है।

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कोटा

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Suman Saurabh

Jun 18, 2024

Villagers are keeping vigil in Kota Rajasthan to deal with theft incidents

कुंदनपुर, सांगोद। चोरी की वारदातों पर अंकुश लगाने को लेकर यूं तो रात्रि गश्त की जिम्मेदारी एवं दायित्व पुलिस विभाग का है, लेकिन कई कारणों से ऐसा संभव नहीं है कि पुलिस थाना क्षेत्र के सभी गांवों में गश्त कर सके।

ऐसे में इन गांवों के ग्रामीण खुद जागरूक होकर पुलिस का दायित्व निभाते हुए रात्रि गश्त कर रहे है ताकि इलाके में अज्ञात लोगों की आवाजाही ना हो और चोरी जैसी वारदातों पर अंकुश रहे। कुंदनपुर क्षेत्र के भी कई गांवों में इन दिनों ग्रामीण दल बनाकर चोरों से खुद सावधानी बरत रहे हैं तथा रात्रि गश्त कर पूरे गांव की निगरानी कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि पुलिस विभाग में गांवों में बीट ऑफिसर तो तैनात हैं लेकिन नफरी इतनी ज्यादा नहीं होती की पुलिस थाने के अधीन सभी गांवों में रात्रि गश्त हो सके। सांगोद थाने के अधीन भी दर्जनों गांव है, जहां रात्रि गश्त पुलिस के लिए संभव नहीं है। ऐसे में इन गांवों के ग्रामीण ही खुद जागरूक होकर पुलिस की भूमिका में नजर आने लगे है। क्षेत्र के कई गांवों में ग्रामीण टोली के रूप में राशि गश्त करते हैं। बकायदा इसके लिए ग्रामीणों ने अपने स्तर पर अलग-अलग टोलियां बना रखी है जो अलग-अलग समय पर गश्त करती है।

ताकि ना हो कोई वारदात

ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में आए दिन चोरी की वारदातें हो रही हैं। घरों के साथ ही अज्ञात चोर खेतों में भी कृषि संबंधित उपकरणों की चोरी कर रहे है। गत दिनों कुराडिय़ाखुर्द समेत कई गांवों में चोर लाखों रुपए के सोने-चांदी के आभूषण एवं नकदी पर हाथ साफ कर फरार हो गए। पुलिस प्रत्येक गांव में गश्त नहीं कर सकती। ऐसे में ग्रामीण खुद जागरूक होकर अपने स्तर पर टोली बनाकर रात्रि में गश्त करते है ताकि ऐसी वारदातों पर अंकुश लग सके। ग्रामीण सुरक्षा को लेकर हाथों में लकडिय़ां व रोशनी के लिए टॉर्च थामे पूरी रात गांव में गश्त करते हैं।

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