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नारी विशेष-जिस देश में पैडमैन मूवी करोड़ों की कमाई कर लेती है,उस देश में सेनेटरी पैड्स के लिए क्यों मोहताज है नारी

पीरियड्स के दौरान सेनेटरी पैड्स तक के लिए तरसती हैं जेल में निरुद्ध महिलाएं

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कोटा

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Zuber Khan

Jul 04, 2018

women

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कोटा.ये तो महज बानगी भर है... जेल में कैद महिलाओं के हालात इससे बदतर हैं। औरत की जिंदगी के सबसे अहम 'वो दिन', जिनकी वजह से उसे मातृ शक्ति श्रेष्ठता प्राप्त है, उसके लिए जहन्नुम सरीखे हो जाते हैं। पीरियड्स में उन्हें सुरक्षा और स्वच्छता के साधन तक उपलब्ध नहीं करवाए जाते। वो कभी तन ढ़कने के लिए दिए कपड़ों, तो कभी जेल के किसी कोने में पड़ी पॉलीथिन और कागज से लाज बचाती हैं। रुपहले पर्दे पर मेंस्ट्रुअल हाईजीन का मुद्दा उछालकर 'पैडमैन' वाहवाही लूटने के साथ ही बॉक्स ऑफिस पर भी करोड़ों की कमाई कर लेता है, लेकिन जमीनी हकीकत यह कि जेल की सलाखों में कैद 'आधी दुनिया' के लिए यह महज एक ख्वाब है। मुद्दे पर खुलकर बात करना तो दूर, जानकारियां मुहैया कराने तक में जेल अफसर संतरी बगलें झांकने लगते हैं। कोटा संभाग की चार जेलों में बंद 63 महिला बंदियों के वास्ते किस महीने कितने सेनेटरी पैड्स मंगाए गए, एक भी जेल अधीक्षक नहीं बता पाया।

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महिला स्टाफ की भी बेरुखी
यही नहीं, जब बात दर्द को साझा करने की आती है तो महिला कांस्टेबल तक बंदियों को पीरियड्स के दौरान उनके हाल पर छोड़ देती हैं। जेल में कार्यरत महिला कर्मचारियों तक को इन बंदियों की तकलीफ और रूह झकझोरने वाली जलालत का जरा भी आभास नहीं।

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खोखले दावे
कोटा केन्द्रीय कारागार : अफसरों का दावा है कि जेल की केंटीन में सेनेटरी पैड्स मौजूद हैं। यानि, महिलाएं जरूरत पडऩे पर इन्हें खरीदें।

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झालावाड़ कारागार : अधिकारी दावा करते हैं कि सीएमएचओ के यहां से सेनेटरी पैड्स की नि:शुल्क सप्लाई की जाती है। कब-कितने पैड्स आए, इसकी जानकारी उन्हें नहीं।


बारां जेल : यहां भी अफसर भी सीएमएचओ दफ्तर से पैड्स आने और जेल के डॉक्टरों द्वारा नि:शुल्क बांटने का दावा करते हैं, लेकिन जो महिलाएं घर तक में पीरियड्स पर संकोचमय रहती हैं, वो पुरुष चिकित्सक से पैड्स कैसे मांगें, इसका उनके पास कोई जवाब नहीं।


पोल खोलती हकीकत


सीएमएचओ :सप्लाई 2015 से बंद
कोटा संभाग के प्रभारी आरएमएससीएल डॉ. आलोक शर्मा जेल प्रशासन के दावों को झुठलाते हैं। वे बताते हैं कि सीएमएचओ के स्तर से सिर्फ किशोरी स्वच्छता योजना के तहत बीपीएल महिलाओं और स्कूली छात्राओं के लिए ही सेनेटरी पैड्स की सप्लाई की जाती है। जेल में सेनेटरी पैड्स की सप्लाई वर्ष 2015 के बाद बंद कर दी गई थी। इसके बाद मेडिकल कॉलेज वेयर हाउस से ही वहां दवा आदि की सप्लाई होती है।

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मेडिकल कॉलेज: डिमांड आए तो ही सशुल्क सप्लाई
मेडिकल कॉलेज वेयर हाउस के फार्मासिस्ट सईद बोले- हम अपनी तरफ से कुछ भी नहीं देते। जेल से जो डिमांड आती है उसी की सप्लाई की जाती है। सेनेटरी पैड्स भी नि:शुल्क नहीं दिए जाते, वाउचर कट कर आता। ये भी तभी देते हैं जब हमारे पास उपलब्ध हों। जेल डिमांड नहीं करेंगे तो सेनेटरी पैड्स जैसी चीज उन्हें हम आगे बढ़कर क्यों देने लगे?


साफ-सफाई के हालात होते हैं बदतर, कपड़े और पॉलीथिन का करती हैं इस्तेमाल

केस स्टडी-1

बंदूकों के साए चारों ओर ...फिर भी वो सहमी खड़ी थी ...मानो सारे जहान के गुनाहों को उसने आज ही अंजाम दिया... मर्दों से भरी बूंदी की कचहरी में सिर से पैर तक स्केन करती हर नजर एक गुनहगार को तलाश रही थी... लेकिन, किसी के पास 'खाकी' के उस गुनाह को देखने की फुर्सत नहीं थी जिसने उसके पैरों के गेहुएं रंग को भी लाल कर डाला था..पेशी पर आई ये महिला तीन दिन से मासिक धर्म से थी, जेल प्रशासन ने उसे सेनेटरी पैड मुहैया नहीं कराया।


केस स्टडी-2
दो दिन से महावारी से हूं... पेट दर्द और मासपेशियों की अकडऩ जो पीड़ा दे रही है उसके आगे जेल की दिक्कतें मामूली लगने लगी हैं...सफाई के साधनों की बात तो छोडि़ए सेनेटरी पैड तक नहीं मिल रहा... पहनावे के कपड़े फाड़ बामुश्किल 'लाज' बचाने की कोशिश कर रही हूं...कोटा की कचहरी में पेशी पर लाई गई इस महिला की छलकती आंखें उसका दर्द बयां करने को काफी थी।

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एेसे हुआ सच का सामना
10 जून को संस्कृति संस्था की अध्यक्ष शालिनी विजय महिला कैदियों को पानी की बोतलों का वितरण करने बूंदी जेल गई। जब उन्होंने महिलाओं से तकलीफें पूछी तो रोंगटे खड़े करने वाली सच्चाई से सामना हुआ। महिला बंदियों ने उन्हें बताया कि पीरियड्स के दौरान सेनेटरी नेपकिन तो छोडे़ं, साफ कपड़ा तक नहीं मिलता। मजबूरन पॉलीथिन या कागज का इस्तेमाल करना पड़ता है। जेल अधीक्षक राजेश कुमार से जब बात की गई तो उन्होंने भी इस कड़वी हकीकत को स्वीकारा। कहा कि, कई मर्तबा स्वास्थ्य विभाग से पैड्स की सप्लाई नहीं मिलती। समस्या का समाधान पूछने पर वो कहते हैं, ऐसे हालात में जेल के डॉक्टर और बाबू को इसकी खरीदारी करनी चाहिए, लेकिन आखिरी बार पैड्स कब खरीदे गए इसकी जानकारी उन्हें भी नहीं है।


डॉक्टर्स वार्निंग जान तक को खतरा
पीरियड्स के दिनों में सफाई नहीं रखने से बैकट्रीरियल इंफ़ेक्शन हो सकता है। किडनी खराब हो सकती है, सर्वाइकल कैंसर हो सकता है। एेसी लापरवाही उन्हें मौत के मुंह में धकेल रही है।
-डॉ. निधि सुवालका, प्रसूति एवं महिला रोग विशेषज्ञ


महिला आयोग निर्देश जारी करूंगी

जेल में निरुद्ध महिलाओं को सेनेटरी पैड्स उपलब्ध नहीं करवाना गंभीर मसला है। मैं चारों जिलों के जेल अधीक्षकों को महिला कैदियों को नि:शुल्क सेनेटरी पैड्स उपलब्ध करवाने के निर्देश जारी करूंगी।
-सुमन शर्मा, अध्यक्ष, राजस्थान महिला आयोग