
सुरेड़ा की खदान जिससे सुकेत में जलापूर्ति होती है।
संजय तिवाड़ी
Kota News: लाइम स्टोन की गहरी खदानों से उपखंड के भूजल स्तर् में गिरावट आने से लम्बे समय तक डार्क जोन का तमगा झेलने वाले उपखंड में अब बंद हुई खदानों में संग्रहित होने वाला बरसाती पानी किसानों के लिए फसल सिंचाई में वरदान बना हुआ है। उपखंड के जिन किसानों ने खनन उत्पादन के समय में लम्बे समय तक चलने वाली खनन प्रक्रिया के कारण भूजल गिरने पर फसल पिलाई नहीं होने से संकट झेला, अब ऐसे किसानों के लिए खदान बंद होने से उसमें भरा बरसाती पानी वरदान साबित हो रहा है। हजारों बीघा भूमि इससे सिंचित हो रही है। कुछ जगह तो इन खदानों के पानी की उपलब्धता से बगीचे भी लग चुके है।
रामगंजमंडी क्षेत्र में एक समय जब कुकड़ा, सहरावदा, जालिमपुरा, दाबादेह, अतरालिया, सुरेड़ा, सुकेत, पीपाखेड़ी, जुल्मी, लखारिया, सातलखेड़ी, दुर्जनपुरा, कुम्भकोट, चेचट में लाइम स्टोन खनन कार्य परवान नहीं चढ़ा, उस समय इन खदान एरिया के आसपास खेती हुआ करती थी।
खदान की गहराई जैसे जैसे बढ़ने लगी तो भूजल स्तर में गिरावट आने से काश्तकारी पर इसका असर आने लगा। किसानों ने इस कारण जमीनों को सिंचित करने के लिए कुएं भी नहीं खुदवाए। एक फसल लेना और खदानों में रोजगारी से जुड़ने का उन्होंने मार्ग चुन लिया लेकिन जैसे जैसे खदानों में पत्थर की सतह समाप्त हुई तो बड़ी दुर्घटना से खदान व दाते किले वाला पत्थर आया तो यह खदान बंद हो गई। खदान बंद होने का सीधा फायदा लाइम स्टोन की खदान के आसपास के खेत मालिकों को मिलना शुरू हो गया जो इन खदानों में पाइप लाइन बिछाकर पेयजल आपूर्ति का स्रोत भी बनी, जिससे नल योजना तक संचालित हुई। अभी रामगंजमंडी क्षेत्र में कई ऐसे एरिया हैं जो खनन प्रक्रिया से दूर हो चुके हैं, जिसमे कुकड़ा, सहरावदा, दाबादेह, अतरालिया, सुकेत, सुरेड़ा, जुल्मी, शामिल है। इनमें कुछ खदान विभाग को सम्भलाई जा चुकी है। ऐसी खदानों का पानी प्रति वर्ष एकत्रित होता है जिसका उपयोग आसपास के खेत मालिक पम्पों के जरिए फसल को पानी पिला रहे हैं।
यहां का पानी पेयजल योजना में शामिल
सुरेड़ा की खदान में बरसाती पानी पाटली खाल का आता है। यह खदान जब भरती हे तो उसका पानी सुकेत जल योजना में कार्य आता है। जुल्मी में भी खारे पानी की समस्या है वहां कुएं से जलापूर्ति प्रभावित हुई तो लखारिया की बंद खदान का पानी जुल्मी में गर्मी के दिनों में कुछ साल पहले पहुंचाया गया था। अभी यहां राणा प्रताप सागर से जलापूर्ति होने लगी है और लखारिया की खदान में उत्पादन भी शुरू हो चुका है। सहरावदा की खदान जब बंद हुई तो उससे भी पेयजल योजना संचालित हुई थी। अभी यहां कि खदान में भरे पानी का उपयोग किसान पाइप लाइन बिछाकर डीजल पम्प से सिंचाई कर रहे हैं।
खदान बंद, टैंकरों से जलापूर्ति
कुम्भकोट की खदान अभी बंद है, जिसमे अथाह बरसाती पानी का भराव है। इसमें भरे पानी का उपयोग लाइम स्टोन की प्रोसेसिंग इकाइयों में टैंकरों के जरिये हो रहा है। प्रतिदिन टैंकरों में डीजल पम्प से यहां पानी भरा जाता हैं। यह कहने में कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी कि आधे औद्योगिक क्षेत्र कि इकाइयों के लिए खदान का भरा बरसाती पानी वरदान साबित हो रहा है। यह बरसाती पानी नहीं होता तो गर्मी में औद्योगिक क्षेत्र में रोजगार से जुड़े श्रमिक व फैक्ट्री संचालकों को गर्मी में दो से तीन माह तक फैक्ट्रियां बंद करनी पड़ती व श्रमिकों का यहां से पलायन भी होता।
Published on:
22 Mar 2024 03:06 pm
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