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क्या आपका फोन और AI पहले से दे सकते हैं भूकंप की चेतावनी? Malaysia के खतरनाक भूकंप को कैसे मापा गया?

Earthquake Measurement: भूकंप की तीव्रता मापने से लेकर मोबाइल अलर्ट और AI विश्लेषण तक, जानिए कैसे तकनीकें शुरुआती चेतावनी देने में मदद कर सकती हैं।

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भारत

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Nikhil Parmar

Feb 23, 2026

Android Earthquake Alert System

Android Earthquake Alert System| Image Source: ChatGpt

Earthquake Technology: जब भी खबर आती है कि कहीं 7.1 मैग्नीट्यूड का भूकंप आया है, तो सबसे पहले सबके दिमाग में एक ही सवाल उठता है, यह संख्या आखिर बताती क्या है? क्या टेक्नोलॉजी इतनी आगे बढ़ चुकी है कि आपका मोबाइल फोन या AI भूकंप आने से पहले झटकों को पकड़ सकें? आइए इस पूरे मामले को आसान भाषा में समझते हैं।

Earthquake Magnitude: 7.1 मैग्नीट्यूड का असली मतलब

भूकंप की ताकत मापने के लिए आज वैज्ञानिक मोमेंट मैग्नीट्यूड स्केल (Moment Magnitude Scale - Mw) का इस्तेमाल करते हैं। यह पुराने रिक्टर स्केल से ज्यादा सटीक माना जाता है। मैग्नीट्यूड स्केल लघुगणकीय (logarithmic) होता है। इसका मतलब है कि हर एक अंक बढ़ने पर ऊर्जा लगभग 32 गुना बढ़ जाती है। यानी 7.0 का भूकंप, 6.0 से करीब 32 गुना ज्यादा ऊर्जा छोड़ सकता है। भूकंप को मापने के लिए सीस्मोग्राफ नाम की मशीन का उपयोग होता है। यह जमीन के कंपन को रिकॉर्ड करती है और डेटा तुरंत वैज्ञानिक केंद्रों तक भेजती है।

Mobile Earthquake Alert: क्या मोबाइल फोन भूकंप पकड़ सकता है?

यह सुनने में अजीब लगता है, लेकिन हां कुछ हद तक ये संभव है। एंड्रॉइड स्मार्टफोन में एक सिस्टम आता है जिसे एक्सेलेरोमीटर सेंसर कहते है। ये सेंसर जमीन के छोटे कंपन को महसूस कर सकता है। गूगल का Android Earthquake Alert System इसी तकनीक पर काम करता है। जब भी किसी इलाके में कई फोन एक साथ असामान्य कंपन महसूस करते हैं, तो सिस्टम उसे जांचता है और जरूरत पड़ने पर अलर्ट जारी करता है। हालांकि, यह इतना प्रभावी नहीं लगता लेकिन आने वाले समय में ये प्रभावी हो सकता है।

Satellite And AI Earthquake Prediction: सैटेलाइट और AI की भूमिका

सैटेलाइट सीधे भूकंप की भविष्यवाणी नहीं करते। वे धरती की सतह में होने वाले बदलाव को महसूस करते है। वे प्लेटों की हलचल या जमीन का उठना-धंसना, मापते हैं। उसके बाद GPS और रिमोट सेंसिंग तकनीक से वैज्ञानिक समझते हैं कि किस इलाके में दबाव बढ़ रहा है। AI इन आंकड़ों का बारीक अध्ययन करता है। इससे जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान और बेहतर तैयारी संभव होती है। फिलहाल विज्ञान इतनी सटीकता तक नहीं पहुंचा है कि किसी खास दिन और समय का भूकंप पहले से बताया जा सके। AI संभावनाएं देखता है उनका आकलन करता है लेकिन 100% सटीक भविष्यवाणी अभी संभव नहीं है।