
The problems of living in a hostel: Mental health and social isolation
Problems during hostel life: हॉस्टल लाइफ नयी जगह, नयी आजादी के साथ कई फिजिकल और मेंटल हेल्थ चैलेंजेज लेकर आती है। हॉस्टल में रहने वाले बच्चों को कई हेल्थ इश्यूज होते है। इनमें कॉमन रूम, बाथरूम शेयरिंग जैसी प्रोब्लेम्स के अलावा इन्फेक्शन का खतरा भी रहता है। इसके अलावा अनहेल्दी और बिना पोषण वाला खाना, एक्सरसाइज की कमी, नींद की कमी, स्क्रीन एडिक्शन और स्मोकिंग जैसी बुरी आदत भी फिजिकल और मेंटल हेल्थ के लिए खतरा साबित होता है। ये देखा गया है कि कई बच्चे परिवार और दोस्तों से अलग होने के कारण होमसिकनेस और अकेलापन जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं से जूझते है। कुल मिलाकर हॉस्टल लाइफ एक्सपीरियंस करने वालों बच्चों के लिए यह आवश्यक है कि वे अपने स्वास्थ्य को प्रायोरिटी रखें और प्राथमिकता दें नयी लाइफ की चैलेंजेज का सामना करते हुए एक हेल्दी और हैप्पी लाइफस्टाइल अपनाएं। यहां हमने हॉस्टल लाइफ में होने वाली कुछ आम समस्याओं पर रोशनी डाली है।
Bad Habits: नयी फ्रीडम का नतीजा यह भी देखा गया है की हॉस्टल के बच्चे स्मोकिंग, शराब और यहां तक की ड्रग्स के आदि हो जाते है। अक्सर बच्चे कुछ नया ट्राई करने के विचार से शुरू करते है और फिर यह एक आदत बन जाती है। इसके अलावा कई बार यह आदत पड़ने का कारण मेन्टल हेल्थ इश्यूज जैसे स्ट्रेस, एंग्जायटी और डिप्रेशन हो सकता है जो नए माहौल, नए लोग और नयी जिंदगी की वजह से होते है।
Lack of Sexual Education: घर के प्रोटेक्टिव देखरेख से सीधे फ्रीडम की दुनिया में जाने वाले बच्चे कई बार गुमराह हो सकते है। नयी- नयी आजादी संभालना हर किसी बच्चे के बस में नहीं होता है। यही कारण है की कुछ जवान बच्चे बिना पूरी सेकशुअल एजुकेशन के सेक्शुअल एक्टिविटी में एंगेज होते है जिससे वे सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इन्फेक्शन (STI) और अनचाही प्रेगनेंसी का शिकार हो सकते है।
Low Nutrition and Weight issues: वो बच्चे जो हॉस्टल में रहते है उन्हें खाने पीने की समस्या अकसर होती है। कभी हॉस्टल का बेस्वाद खाना तो कभी जंक फ़ूड खाने वाले बच्चों में पोषण की कमी होती है। ऐसे में बहुत कम बच्चों को पूरा नुट्रिशन मिल पाता है। इन बच्चों में नुट्रिशन की कमी के कारण वजन कम होना या फ़ास्ट फ़ूड की वजह से मोटापा बढ़ सकता है।
Less Physical Activity: मोबाइल कल्चर और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते ट्रेंड ने बच्चों को सीरीज और मूवीज के साथ ही इंटरनेट सर्फिंग की आदत डाल दी है। हॉस्टल में रहने वाले कई बच्चों पर ना ही कोई रोक टोक होती है और ना ही सेल्फ रेगुलेशन। ऐसे में उनकी फिजिकल एक्टिविटी में कमी होना आम बात है। इसका असर उनकी नींद और हेल्थ पर पड़ सकता है। वे नींद की समस्या का अनुभव करते हैं, जो उनकी पढाई पर तो बुरा असर डालता ही है साथ ही दूसरे हेल्थ इश्यूज हो सकती है। वे नींद की कमी, ओबेसिटी और हार्ट डिजीज जैसी प्रोब्लेम्स का शिकार हो सकते है।
Infectious diseases: हॉस्टल में रहने वाले बच्चे अक्सर एक छोटी जगह में तीन से चार लोग रहते है। ऐसे में किसी एक को कोई इन्फेक्शन हो तो वो दूसरों को होने की समभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा कई बार बच्चे साफ-सफाई का धान भी नहीं रखते जिससे भी बिमारी फ़ैल सकती है।
Chronic health conditions: हॉस्टल लाइफ में एक ओर जहां पढाई और अकेले रहने के चैलेंजेज होते है वहीं उन बच्चों में जिन्हें क्रोनिक डिजीजेज है परेशानी ओर बढ़ जाती है। उदहारण के तौर पर जो बच्चे अस्थमा या डायबिटीज जैसी पुरानी हेल्थ प्रोब्लेम्स से जूझ रहे है उनके लिए हॉस्टल लाइफ में मुश्किलें और ज़्यादा बढ़ जाती है।
Published on:
25 Apr 2023 10:01 am
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