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11 जनवरी मामला: 55 लोगों की मौतों का कौन जिम्मेदार, आज भी रोती हैं यहां की विधवाएं

11 जनवरी मामला: 55 लोगों की मौतों का कौन जिम्मेदार, आज भी रोती हैं यहां की विधवाएं

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लखनऊ

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Ruchi Sharma

Jan 11, 2018

illegal liquor

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लखनऊ. दशहरी आमों के लिए मशहूर मलिहाबाद इलाके के दतली व खड़ता गांव की महिलाओं के लिए 11 जनवरी का दिन किसी कलंक से कम नहीं है। आज ही के दिन जहरीली शराब ने यहां मौत का तांडव मचाकर दर्जनों महिलाओं का सुहाग छीन लिया था। दरअसल, साल 2015 में आज ही के दिन क्रिकेट मैच का फाइनल देखने कई गांवों के लोग इकट्टठा थे। पास में ही जुगनू का कच्ची शराब का अड्डा था। मैच देखने पहुुंचे ग्रामीणों ने कच्ची शराब पी जिसके बाद घर पहुंचते ही उनकी तबीयत बिगड़ने लगी । धीरे- धीरे 55 लोगों की मौत हो गई थी। इसमें मरने वाले ज्यादातर दतली व खड़ता के निवासी थे।


ये था मामला

11 जनवरी 2015 को मलिहाबाद थाना क्षेत्र के दतली गांव में चल रहे क्रिकेट टूर्नामेंट को देखने आस पास के गांवों के लोग पहुंचे थे। दतली गाँव निवासी जुगनू कच्ची शराब का मुख्य व्यापारी है। वह आसपास के करीब दर्जन भर गांवों में कच्ची शराब बनाकर कई सालों से बेच रहा था। उसके साथ इस काम में गटरु, कतलू, भूरे, बदई भी शामिल है।

मैच देखने आये आस पास के गांवों के ग्रामीणों ने कच्ची शराब खरीदी और रात करीब 11 बजे तक सब ग्रामीणों ने शराब पी। इसके बाद सभी ग्रामीण अपने अपने घरों को चले गए। घर पहुंचने के बाद सभी लोगों की धीरे-धीरे तबीयत बिगड़ने का सिलसिला शुरू हो गई। सुबह होते होते लोगों के मरने और अस्पतालों में भर्ती होने का सिलसिला शुरू हो गया। सूचना मिलते ही आला अधिकारी मौके पर पहुंचने लगे।

आज भी रोती हैं यहां विधवाएं

खड़ता की रहने वाली माया देवी के कहना हैं कि पति के जाते ही दुख का पहाड़ टूट पड़ा है। पांच बच्चों की की परवरिश के साथ बूढ़ी सास की भी देखभाल करती हूं। पति मंगल प्रसाद की मौत के बाद हर कोई मदद का भरोसा दिला रही था, लेकिन समय बीतने के साथ सब भूल गए। बड़ी मुश्किलों से परिवार का गुजारा हो पाता है।

भारती देवी ने बताया कि पति के मौत से ही बीमार रहने लगी हूं। पति थे तो चिंता नहीं थी। सरकार से जो पैसे मिले वो अॉपरेशन में खर्च हो गए है। चार बच्चे हैं, बस जैसे-तैसे जीवन गुजारा कर रहे हैं। बच्चों को भी यही सीख देते हैं कि कभी शराब को हाथ न लगाना।

विमली कहती हैं कि पति के साथ- साथ सब कुछ चला गया। जमीन थी वो भी परिवार पलने में चली गई। अब कुछ पैसे बचा के रखे है बस जैसे-तैसे बेटी का विवाह हो जाए।

पति की मौत के सदमे से ज्ञानवती बीमार रहने लगी। कहती हैं सरकार से जो पैसे मिले अॉपरेशन में खर्च हो गए। चार बच्चे हैं, बस जैसे-तैसे जी रहे हैं। दल साल के बेटे अभिषेक व चार साल के अनमोल को यही सीख देते हैं कि कभी शराब को हाथ न लगाना।

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