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अगले पांच साल में छिन सकती हैं पांच करोड़ नौकरियां!

एसोचैम  के मुताबिक अगले पांच साल में एक करोड़ से ज्यादा नौकरियां छीन सकता है रोबोटिक्स। वैश्विक स्तर पर तेजी से हो रहे प्रौद्योगिकीय विकास की वजह से अगले पांच साल में रोबोट एक करोड़ से ज्यादा लोगों की नौकरियां खत्म कर सकते हैं।

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Prashant Srivastava

Dec 07, 2016

unemployed

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लखनऊ.
वैश्विक स्तर पर तेजी से हो रहे प्रौद्योगिकीय विकास की वजह से अगले पांच साल में कृत्रिम इंसानी विकल्प यानी रोबोट एक करोड़ से ज्यादा लोगों की नौकरियां खत्म कर सकते हैं। यह खुलासा एसोचैम(भारतीय वाणिज्य एवं उद्दोग मंडल) के ताजा अध्ययन में हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक स्तर पर जिस तरह की औद्योगिक क्रान्ति हो रही है, उससे रोबोटिक्स, थ्री डी प्रिंटिंग, कृत्रिम बुद्धि, जीनोमिक्स के रूप में नुकसानदेह प्रौद्योगिकियां भी सामने आ रही हैं। इनकी वजह से बड़ी संख्या में लोग अपनी नौकरी गंवा रहे हैं। सिर्फ भारत में ही अगले पांच साल के दौरान करीब 10 लाख नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है।


ऐसे में एसोचैम ने ‘डिजिटल इंडिया टू रोबोटिक इंडिया’ विषय पर अध्ययन कर लोगों को सटीक क्षमताओं से लैस करने के लिये सरकार, उद्योग क्षेत्र और प्रबुद्ध वर्ग के बीच एक साझीदारी विकसित करने की फौरी आवश्यकता को जरूरी बताया है । एसोचैम के राष्ट्रीय महासचिव डी. एस. रावत ने बुधवार को लखनऊ में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में इस अध्ययन की रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि प्रस्तावित साझेदारी के जरिये हमें क्षमताओं और समयानुकूल शिक्षा की उभरती हुई आवश्यकता को पहचानने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार को स्वचालन (ऑटोमेशन) को लेकर एक राष्ट्रीय नीति का स्वरूप तैयार करना चाहिए। इसमें शीर्ष स्तर के विशेषज्ञों, व्यवसाय जगत, सरकार और श्रमिक वर्ग के प्रतिनिधियों की राय को शामिल किया जाना चाहिए।




सरकार को दिए गए सुझाव-

-केन्द्र सरकार को मेक इन इंडिया के लिए रोबोटिक्स को प्रमुख तत्व के रूप में जोड़ना चाहिए और उसे वैश्विक निर्माणकर्ताओं को देश में अत्यन्त कार्यदक्ष और स्वचालित आपूर्ति श्रंखला सुविधाएं स्थापित करने के उद्देष्य से आकर्षित करने के लिये कार्यक्रम तैयार करना चाहिये।


-यहां यह भी ध्यान देने योग्य बात है कि भारतीय उद्योग क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और उद्यमियों के लिये देश को आकर्षक बनाने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में आर्थिक विकास को गति देने के के लिये रोबोटिक्स प्रौद्योगिकी एक मानी हुई जरूरत है।


- एसोचैम का उत्तर प्रदेश की सरकार को सुझाव है कि वह अपनी क्षमता विकास नीति को इस तरह की बनाए जिससे निजी क्षेत्र को अनुकूल माहौल मिले, बेहतर बुनियादी ढांचा उपलब्ध हो औऱ साथ ही प्रदेश में ईज़ आॅफ़ डुइंग बिज़नेस को बढ़ावा मिले।


- भारत में अनेक वैश्विक आॅटोमोबाइल कम्पनियों ने अपना बेस तैयार करना शुरू किया है। इसके अलावा अनेक कम्पनियां स्वनिर्मित वाहनों को दूसरे देशों में निर्यात करने की उम्मीद लगाये हैं। ऐसे में अनेक भारतीय तथा संयुक्त उपक्रम रूपी कम्पोनेंट फर्मों को अन्तर्राष्ट्रीय मानकों से पार पाने के लिये सघन स्वचालन प्रौद्योगिकी की जरूरत होगी।


- रावत ने कहा ‘‘हमें ऐसे क्षेत्रों में स्वचालन तकनीक को अनिवार्य रूप से अपनाये जाने की उम्मीद करनी चाहिये जहां रेडियोएक्टिव सामग्री और संक्षारक रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है। इससे स्पष्ट है कि स्वास्थ्य के लिये खतरनाक उद्योगों में काम करने वालों के लिये रोबोटिक्स उनकी सुरक्षा में मददगार होता है, ना कि उनका स्थान लेता है।’’


-नौकरियां खत्म होने की चिन्ताओं का समाधान करते हुए यह अध्ययन कहता है ‘‘सेक्टर के स्वचालन और रोबोटिक्स का इस्तेमाल मानव श्रमिकों के रोजगार की कीमत पर करने की जरूरत नहीं है। इन दोनों का सहअस्तित्व सम्भव है। उद्योगों को रोबोट के इस्तेमाल को प्रतिस्पदर्धी लाभ लेने की दिशा में उठाए गये कदम के रूप में देखना चाहिये।’’


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