11 फ़रवरी 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

अखिलेश यादव के राजनीतिक सफर में बड़ा उलटफेर, 18 साल बाद आया ये समय, अब लिखेंगे सियासत का नया अध्याय

अखिलेश यादव इस समय विधान परिषद के सदस्य हैं और उनका कार्यकाल इसी साल 5 मई को खत्म हो रहा है...

2 min read
Google source verification

लखनऊ

image

Nitin Srivastva

Apr 17, 2018

Akhilesh Yadav political career in Samajwadi Party UP India news

अखिलेश यादव के राजनीतिक सफर में बड़ा उलटफेर, 18 साल बाद आया ये समय, अब लिखेंगे सियासत का नया अध्याय

लखनऊ. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के पॉलिटिकल करियर तकरीबन 18 साल बाद ऐसा समय वापस आया है, जब वह किसी भी सदन के सदस्य नहीं रहेंगे। अखिलेश यादव अब न संसद में रहेंगे और न उत्तर प्रदेश विधान परिषद में। अखिलेश अब सदन में बीजेपी सरकार को घेरने मौजूद नहीं रहेंगे। आपको बता दें कि अखिलेश यादव इस समय विधान परिषद के सदस्य हैं और उनका कार्यकाल इसी साल 5 मई को खत्म हो रहा है।

यहां से शुरू हुआ था अखिलेश का राजनीतिक सफर

सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के बेटे अखिलेश यादव ने अपने सियासी सफर की शुरुआत साल 2000 के लोकसभा उपचुनाव से की थी। अखिलेश ने कन्नौज से लोकसभा का उपचुनाव जीता था। इसी के बाद से ही मुलायम सिंह यादव बेटे अखिलेश को सियासत में फ्रंट में उतार दिया। अखिलेश यादव उसके बाद भी लगातार दो लोकसभा चुनाव जीते। अखिलेश यादव कुल तीन बार सांसद बने।

मुलायम ने सौंपी सरकार की कमान

साल 2012 में जब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला तो मुलायम सिंह यादव ने उन्हें सरकार की कमान सौंप दी। इसके बाद उन्होने लोकसभा से इस्तीफा दे दिया और वह विधान परिषद के लिए चुने गए। जिसके बाद अब उनका 6 साल का कार्यकाल खत्म हो रहा है। अब वह किसी सदन के सदस्य नहीं रहेंगे। अखिलेश यादव अभी तक एक बार भी राज्यसभा और विधानसभा के सदस्य नहीं रहे हैं।

नरेश उत्तम को भेजा विधान परिषद

अपना कार्यकाल खत्म होने के बाद भी अखिलेश यादव ने खुद विधान परिषद न जाकर सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम को भेजा है। ऐसा केवल अखिलेश यादव के साथ ही नहीं है बल्कि ठीक यही स्थिति गठबंधन में उनकी साथी बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती की भी है। मायावती भी अब किसी भी सदन की सदस्य नहीं हैं। मायावती ने पिछले साल राज्यसभा से अपना इस्तीफा दिया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि दलितों की आवाज नहीं सुनी जा रही है। अखिलेश और मायावती के अलावा कांग्रेस के प्रमोद तिवारी भी अब किसी सदन के सदस्य नहीं रहेंगे। क्योंकि उनका भी राज्यसभा में कार्यकाल खत्म हो गया है।

अखिलेश कन्नौज से लड़ेंगे लोकसभा चुनाव

सपा सूत्रों की अगर मानें तो अखिलेश यादव 2019 में होने वाला लोकसभा चुनाव कन्नौज से लड़ने जा रहे हैं। फिलहाल अभी उनकी पत्नी डिंपल यादव यहां से सांसद हैं। अखिलेश यादव के इस्तीफा देने के बाद डिंपल यादव पहली बार कन्नौज से लोकसभा का उपचुनाव जीतीं और सांसद बनीं। अखिलेश यादव ने ये ऐलान किया है कि उनकी पत्नी डिंपल यादव अब कोई चुनाव नहीं लड़ेंगी। जिसके बाद से ही ये कयास लगाए जा रहे थे कि उनकी सीट से अखिलेश यादव खुद लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। सपा नेताओं के मुताबिक पार्टी ने इसके लिए वहां तैयारी भी शुरू कर दी है।