
समर्थकों का कहना है की CBI की स्पेशल कोर्ट से बरी होने के बाद इस पीटीशन को सिर्फ परेशान करने के लिए दाखिल किया गया था। अब सच सबके सामने है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने भाजपा के सीनियर नेता लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती समेत बाबरी विध्वंस मामले में आरोपी सभी नेताओं को बरी करने के खिलाफ डाली गई पिटीशन खारिज कर दी है।
सरकार और CBI ने कहा ने कहा- दोनों पीटीशनर का इस केस से कोई मतलब नहीं यह आदेश जस्टिस रमेश सिन्हा और सरोज यादव की अध्यक्षता वाली पीठ ने अयोध्या के रहने वाले हाजी महमूद अहमद और सैयद अखलाक अहमद की पिटीशन खारिज कर दी।
पिटीशन में बाबरी विध्वंस के आरोपी भाजपा के सीनियर लीडर लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, विनय कटियार, बृज मोहन शरण सिंह, प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कल्याण सिंह और साध्वी ऋतंबरा सहित 32 नेताओं को अदालत द्वारा निर्दोष साबित किए जाने के निर्णय को चुनौती देते हुए कहा गया था कि ट्रायल कोर्ट ने लेटर में मौजूद सुबूतों की अनदेखी करके आरोपितों को बरी कर दिया था।
स्टेट गवर्नमेंट और CBI ने कहा कि दोनों अपीलकर्ता मामले के न तो पीड़ित हैं और न ही प्राइमरी शिकायतकर्ता हैं। ऐसे में उनकी पिटीशन को मान्यता नहीं दी जा सकती है। पिटीशन पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।
6 दिसंबर को मस्जिद ध्वस्त किया गया, 28 साल लंबा चला मुकदमा
कारसेवकों ने अयोध्या में 6 दिसंबर 1992 को बाबरी के ढ़ांचे को ध्वस्त कर दिया था। 28 साल चले लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 30 सितंबर 2020 को लखनऊ में फैसला सुनते हुए CBI की विशेष अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। ट्रायल कोर्ट ने न्यूज पेपर की कटिंग और वीडियो क्लिपिंक को सुबूत मानने से इनकार कर दिया था।
मस्जिद टूटने के बाद भड़का दंगा, करीब 2 हजार लोगों की मौत हुई थी
6 दिसंबर को मस्जिद विध्वंस की खबर फैलते ही देश में सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे। मुंबई और दिल्ली सहित कई मेन इंडियन सिटी दंगे भड़के, इसके परिणाम में लगभग 2 हजार से अधिक लोगों की मौत हुई थी।
Updated on:
09 Nov 2022 07:37 pm
Published on:
09 Nov 2022 07:35 pm
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